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प्रकाशित-वाक्‍य 9
1
जखन पाँचम स्‍वर्गदूत धुतहू फुकलनि, तँ हम एकटा तारा देखलहुँ जे आकाश सँ पृथ्‍वी पर खसल छल। ओहि तारा केँ अथाह कुण्‍डक कुंजी देल गेलैक।
2
ओ अथाह कुण्‍ड केँ खोललक। एहि पर ओहि कुण्‍डक धुआँ, जे बड़का भट्ठाक धुआँ सन छल, बहरायल। ओहि धुआँ सँ सूर्य छेका गेल आ आकाश अन्‍हार भऽ गेल।
3
ओहि धुआँ मे सँ पृथ्‍वी पर फनिगा सभ बाहर आयल। ओकरा सभ केँ एहन शक्‍ति देल गेलैक, जेहन पृथ्‍वी परक बिच्‍छु सभक होइत छैक।
Maithili Bible 2010