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प्रकाशित-वाक्‍य 4
1
तकरबाद हम आँखि ऊपर उठौलहुँ तँ हमरा सोझाँ मे स्‍वर्ग मे एक द्वारि देखाइ पड़ल जे खुजल छल। जिनका हम पहिने धुतहू सन आवाज मे अपना सँ बात करैत सुनने छलहुँ, से कहि रहल छलाह जे, “एतऽ ऊपर आउ, हम अहाँ केँ ओ घटना सभ देखायब जे एकरा बाद होमऽ वला अछि।”
2
ओही क्षण हमरा प्रभुक आत्‍मा अपना नियन्‍त्रण मे लेलनि। हम देखलहुँ जे स्‍वर्ग मे एक सिंहासन राखल अछि आ सिंहासन पर केओ विराजमान छथि।
3
ओ सूर्यकान्‍त आ गोमेद वला बहुमूल्‍य पाथर जकाँ सुन्‍दर देखाइ दऽ रहल छलाह। सिंहासनक चारू कात मरकत पाथर जकाँ पनिसोखा देखाइ पड़ि रहल छल।
Maithili Bible 2010