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प्रकाशित-वाक्‍य 3
1
“सरदीसक मण्‍डलीक दूत केँ ई लिखह, जिनका लग परमेश्‍वरक सात आत्‍मा छनि आ जे सातो तारा हाथ मे धयने छथि से ई कहैत छथि—हम अहाँक काज सभ सँ परिचित छी। अहाँ नाम मात्र केँ जीवित छी, मुदा छी वास्‍तव मे मरल।
2
जागू, आ जे किछु अहाँ लग बाँचल अछि, तकरा मजगूत बनाउ, कारण ओहो मरऽ पर अछि। हम अपन परमेश्‍वरक दृष्‍टि मे अहाँक काज सभ केँ अपूर्ण पौलहुँ।
3
स्‍मरण करू जे अहाँ कोन उपदेश सुनने छलहुँ आ स्‍वीकार कयने छलहुँ। ओकर पालन करू आ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू। जँ अहाँ नहि जागब, तँ हम चोर जकाँ आबि जायब—अहाँ केँ बुझहो मे नहि आओत जे हम कखन अहाँ लग पहुँचि रहल छी।
Maithili Bible 2010