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प्रकाशित-वाक्‍य 2
1
“इफिसुसक मण्‍डलीक दूत केँ ई लिखह, ओ जे अपन दहिना हाथ मे सातो तारा धयने छथि आ दीप राखऽ वला सोनाक सातो लाबनिक बीच चलैत-फिरैत छथि से ई कहैत छथि—
2
हम अहाँक काज सभ सँ, अहाँक परिश्रम आ अहाँक सहनशीलता सँ परिचित छी। हम जनैत छी जे अहाँ दुष्‍ट लोक सभ केँ बरदास्‍त नहि करैत छी। जे सभ अपना केँ मसीह-दूत कहैत अछि मुदा अछि नहि, तकरा सभ केँ अहाँ जाँच कयने छी आ झुट्ठा पौने छी।
3
अहाँ सभ धैर्य रखने छी, हमरा नामक कारणेँ कष्‍ट सहने छी आ निराश नहि भेलहुँ।
Maithili Bible 2010