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प्रकाशित-वाक्‍य 18
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एहि वस्‍तु सभक व्‍यापारी सभ, जे सभ ओहि नगरक कारणेँ धनवान भऽ गेल छल, से सभ आब ओकर यातना देखि कऽ भयभीत भऽ दूरे सँ ठाढ़ भऽ कानि-कानि कऽ शोक करत,
Maithili Bible 2010