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2 पत्रुस 3
1
प्रिय मित्र सभ, हम अहाँ सभ केँ आब ई दोसर पत्र लिखि रहल छी। हम दूनू पत्र मे किछु बात सभक स्‍मरण दिअबैत अहाँ सभक मोन केँ जागरूक करऽ चाहलहुँ, जाहि सँ अहाँ सभ एहि बात सभक बारे मे ठीक प्रकार सँ सोची।
2
हम चाहैत छी जे, जे बात सभ प्राचीन समय मे परमेश्‍वरक पवित्र प्रवक्‍ता सभ द्वारा कहल गेल, और जे आज्ञा अपना सभक प्रभु आ उद्धारकर्ता अहाँ सभक मसीह-दूत लोकनि द्वारा अहाँ सभ केँ सुनबौलनि, ताहि सभ बातक अहाँ सभ स्‍मरण करी।
3
सभ सँ पहिने अहाँ सभ ई जानि लिअ जे अन्‍तिम दिन सभ मे हँसी उड़ाबऽ वला धर्मनिन्‍दक सभ आओत। ओ सभ अपन अधलाह इच्‍छा सभक अनुसार विचार-व्‍यवहार करत
Maithili Bible 2010