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بائبل ایک سال میں
اپریل ۱۳

لوقا ۱۱:۲۹-۵۴
۲۹. “ जब बड़ी भीड़ जमा' होती जाती थी तो वो कहने लगा, ““इस ज़माने के लोग बुरे हैं, वो निशान तलब करते हैं; मगर युनाह के निशान के सिवा कोई और निशान उनको न दिया जाएगा |""”
۳۰. क्यूँकि जिस तरह युनाह नीनवे के लोगों के लिए निशान ठहरा, उसी तरह इब्न-ए-आदम भी इस ज़माने के लोगों के लिए ठहरेगा |
۳۱. दक्खिन की मलिका इस ज़माने के आदमियों के साथ 'अदालत के दिन उठकर उनको मुजरिम ठहराएगी, क्यूँकि वो दुनिया के किनारे से सुलेमान की हिकमत सुनने को आई, और देखो, यहाँ वो है जो सुलेमान से भी बड़ा है |
۳۲. नीनवे के लोग इस ज़माने के लोगों के साथ, 'अदालत के दिन खड़े होकर उनको मुजरिम ठहराएँगे; क्यूँकि उन्होंने युनाह के एलान पर तौबा कर ली, और देखो, यहाँ वो है जो युनाह से भी बड़ा है |
۳۳. “ ““कोई शख्स चराग जला कर तहखाने में या पैमाने के नीचे नहीं रखता, बल्कि चरागदान पर रखता है ताकि अन्दर जाने वालों को रोशनी दिखाई दे |""”
۳۴. तेरे बदन का चराग तेरी आँख है, जब तेरी आँख दुरुस्त है तो तेरा सारा बदन भी रोशन है, और जब खराब है तो तेरा बदन भी तारीक है |
۳۵. पस देख, जो रोशनी तुझ में है तारीकी तो नहीं !
۳۶. पस अगर तेरा सारा बदन रोशन हो और कोई हिस्सा तारीक न रहे, तो वो तमाम ऐसा रोशन होगा जैसा उस वक़्त होता है जब चराग़ अपने चमक से रोशन करता है |
۳۷. जो वो बात कर रह था तो किसी फरीसी ने उसकी दा'वत की |पस वो अन्दर जाकर खाना खाने बैठा |
۳۸. फरीसी ने ये देखकर ता'ज्जुब किया कि उसने खाने से पहले गुस्ल नहीं किया |
۳۹. “ खुदावन्द ने उससे कहा, ““ऐ फरीसियो ! तुम प्याले और तश्तरी को ऊपर से तो साफ़ करते हो, लेकिन तुम्हारे अन्दर लूट और बदी भरी है |""”
۴۰. ऐ नादानों ! जिसने बाहर को बनाया क्या उसने अन्दर को नहीं बनाया ?
۴۱. हाँ ! अन्दर की चीज़ें खैरात कर दो, तो देखो, सब कुछ तुम्हारे लिए पाक होगा |
۴۲. “ ““लेकिन ऐ फरीसियो ! तुम पर अफ़सोस, कि पुदीने और सुदाब और हर एक तरकारी पर दसवां हिस्सा देते हो, और इन्साफ और खुदा की मुहब्बत से गाफ़िल रहते हो; लाज़िम था कि ये भी करते और वो भी न छोड़ते |""”
۴۳. ऐ फरीसियो ! तुम पर अफसोस, कि तुम 'इबादतखानों में आ'ला दर्जे की कुर्सियाँ और और बाज़ारों में सलाम चाहते हो |
۴۴. तुम पर अफसोफ़ ! क्यूँकि तुम उन छिपी हुई कब्रों की तरह हो जिन पर आदमी चलते है, और उनको इस बात की खबर नहीं |
۴۵. “ फिर शरा' के 'आलिमों में से एक ने जवाब में उससे कहा, ““ऐ उस्ताद ! इन बातों के कहने से तू हमें भी बे'इज्ज़त करता है |""”
۴۶. “ उसने कहा, ““ऐ शरा' के 'आलिमो ! तुम पर भी अफ़सोस, कि तुम ऐसे बोझ जिनको उठाना मुश्किल है,आदमियों पर लादते हो और तुम एक उंगली भी उन बोझों को नहीं लगाते |""”
۴۷. तुम पर अफ़सोस, कि तुम तो नबियों की कब्रों को बनाते हो और तुम्हारे बाप-दादा ने उनको कत्ल किया था |
۴۸. पस तुम गवाह हो और अपने बाप-दादा के कामों को पसन्द करते हो, क्यूँकि उन्होंने तो उनको कत्ल किया था और तुम उनकी कब्रें बनाते हो |
۴۹. “ इसी लिए खुदा की हिक्मत ने कहा है, ““मैं नबियों और रसूलों को उनके पास भेजूँगी, वो उनमें से कुछ को कत्ल करेंगे और कुछ को सताएँगे |'”
۵۰. ताकि सब नबियों के खून की जो बिना-ए-'आलम से बहाया गया, इस ज़माने के लोगों से हिसाब किताब लिया जाए|
۵۱. हाबिल के खून से लेकर उस ज़करियाह के खून तक, जो कुर्बानगाह और मकदिस के बीच में हलाक हुआ |मैं तुम से सच कहता हूँ कि इसी ज़माने के लोगों से सब का हिसाब किताब लिया जाएगा |
۵۲. “ ऐ शरा' के 'आलिमो ! तुम पर अफसोस, कि तुम ने मा'रिफ़त की कुंजी छीन ली, तुम खुद भी दाख़िल न हुए और दाख़िल होने वालों को भी रोका |""”
۵۳. जब वो वहाँ से निकला, तो आलिम और फरीसी उसे बे-तरह चिपटने और छेड़ने लगे ताकि वो बहुत से बातों का ज़िक्र करे,
۵۴. और उसकी घात में रहे ताकि उसके मुँह की कोई बात पकड़े |