A A A A A
بائبل ایک سال میں
اپریل ۱۶

لوقا ۱۳:۱-۲۲
۱. उस वक़्त कुछ लोग हाज़िर थे, जिहोंने उसे उन गलीलियों की खबर दी जिनका खून पिलातुस ने उनके ज़बीहों के साथ मिलाया था |
۲. “ उसने जवाब में उनसे कहा, ““इन गलीलियों ने ऐसा दुख पाया, क्या वो इसलिए तुम्हारी समझ में और सब गलीलियों से ज़्यादा गुनहगार थे?"””
۳. मैं तुम से कहता हूँ कि नहीं; बल्कि अगर तुम तौबा न करोगे, तो सब इसी तरह हलाक होंगे |
۴. या, क्या वो अठारह आदमी जिन पर शेलोख का गुम्बद गिरा और दब कर मर गए, तुम्हारी समझ में यरूशलीम के और सब रहनेवालों से ज्यादा कुसूरवार थे?
۵. “ मैं तुम से कहता हूँ कि नहीं; बल्कि अगर तुम तौबा न करोगे, तो सब इसी तरह हलाक होगे |""”
۶. “ फिर उसने ये मिसाल कही, ““किसी ने अपने बाग़ में एक अंजीर का दरख्त लगाया था | वो उसमें फल ढूँढने आया और न पाया |""”
۷. इस पर उसने बागबान से कहा, 'देख तीन बरस से मैं इस अंजीर के दरख्त में फल ढूँढने आता हूँ और नहीं पाता | इसे काट डाल, ये ज़मीन को भी क्यूँ रोके रहे ?
۸. उसने जवाब में उससे कहा, 'ऐ खुदावन्द, इस साल तू और भी उसे रहने दे, ताकि मैं उसके चरों तरफ थाला खोदूँ और खाद डालूँ |
۹. “ अगर आगे फला तो खैर, नहीं तो उसके बा'द काट डालना'"””
۱۰. फिर वो सबत के दिन किसी 'इबादतखाने में ता'लीम देता था |
۱۱. और देखो, एक 'औरत थी जिसको अठारह बरस से किसी बदरूह की वजह से कमजोरी थी; वो झुक गई थी और किसी तरह सीधी न हो सकती थी |
۱۲. “ ईसा' ने उसे देखकर पास बुलाया और उससे कहा, ““ऐ 'औरत, तू अपनी कमज़ोरी से छूट गयी “"”
۱۳. और उसने उस पर हाथ रख्खे, उसी दम वो सीधी हो गई और खुदा की बड़ाई करने लगी |
۱۴. “'इबादतखाने का सरदार, इसलिए कि ईसा' ने सबत के दिन शिफ़ा बख्शी, खफा होकर लोगों से कहने लगा, ““छ: दिन हैं जिनमें काम करना चाहिए, पस उन्हीं में आकर शिफ़ा पाओ न कि सबत के दिन |""”
۱۵. खुदावन्द ने उसके जवाब में कहा, 'ऐ रियाकारो ! क्या हर एक तुम में से सबत के दिन अपने बैल या गधे को खूंटे से खोलकर पानी पिलाने नहीं ले जाता?
۱۶. “ पस क्या वाजिब न था कि ये जो अब्राहम की बेटी है जिसको शैतान ने अठारह बरस से बाँध कर रख्खा था, सबत के दिन इस कैद से छुड़ाई जाती?"””
۱۷. जब उसने ये बातें कहीं तो उसके सब मुख़ालिफ़ शर्मिन्दा हुए, और सारी भीड़ उन 'आलीशान कामों से जो उससे होते थे, खुश हुई |
۱۸. “ पस वो कहने लगा, ““खुदा की बादशाही किसकी तरह है ? मैं उसको किससे मिसाल दूँ ?""”
۱۹. “ वो राई के दाने की तरह है, जिसको एक आदमी ने लेकर अपने बाग में डाल दिया : वो उगकर बड़ा दरख्त हो गया, और हवा के परिन्दों ने उसकी डालियों पर बसेरा किया |""”
۲۰. “ उसने फिर कहा, ““मैं खुदा की बादशाही को किससे मिसाल दूँ ?""”
۲۱. “ वो खमीर की तरह है, जिसे एक 'औरत तीन पैमाने आटे में मिलाया, और होते होते सब खमीर हो गया |""”
۲۲. वो शहर-शहर और गाँव-गाँव ता'लीम देता हुआ यरूशलीम का सफ़र कर रहा था |