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بائبل ایک سال میں
اپریل ۱۰

لوقا ۱۰:۱-۲۴
۱. इन बातों के बा'द खुदावन्द ने सत्तर आदमी और मुकर्रर किए, और जिस जिस शहर और जगह को खुद जाने वाला था वहाँ उन्हें दो दो करके अपने आगे भेजा |
۲. “ और वो उनसे कहने लगा, ““फस्ल तो बहुत है, लेकिन मज़दूर थोड़े हैं; इसलिए फस्ल के मालिक की मिन्नत करो कि अपनी फस्ल काटने के लिए मज़दूर भेजे |""”
۳. जाओ; देखो, मैं तुम को गोया बर्रों को भेडियों के बीच मैं भेजता हूँ |
۴. न बटुवा ले जाओ न झोली, न जूतियाँ और न राह में किसी को सलाम करो |
۵. और जिस घर में दाखिल हो पहले कहो,‘इस घर की सलामती हो।’
۶. अगर वहाँ कोई सलामती का फ़र्ज़न्द होगा तो तो तुम्हारा सलाम उस पर ठहरेगा, नहीं तो तुम पर लौट आएगा |
۷. उसी घर में रहो और जो कुछ उनसे मिले खाओ-पीओ, क्यूँकि मज़दूर अपने मज़दूरी का हक़दार है, घर घर न फिरो |
۸. जिस शहर में दाख़िल हो वहाँ के लोग तुम्हें क़ुबूल करें, तो जो कुछ तुम्हारे सामने रखा जाए खाओ;
۹. और वहाँ के बीमारों को अच्छा करो और उनसे कहो, 'खुदा की बादशाही तुम्हारे नज़दीक आ पहुँची है |'
۱۰. लेकिन जिस शहर में तुम दाखिल हो और वहाँ के लोग तुम्हें क़ुबूल न करें, तो उनके बाज़ारों में जाकर कहो कि,
۱۱. 'हम इस गर्द को भी जो तुम्हारे शहर से हमारे पैरों में लगी है तुम्हारे सामने झाड़ देते हैं, मगर ये जान लो कि खुदा की बादशाही नज़दीक आ पहुँची है |'
۱۲. मैं तुम से कहता हूँ कि उस दिन सदोम का हाल उस शहर के हाल से ज़्यादा बर्दाशत के लायक होगा |
۱۳. “ ““ऐ ख़ुराज़ीन, तुझ पर अफ़सोस ! ऐ बैतसैदा , तुझ पर अफ़सोस ! क्यूँकि जो मो'जिज़े तुम में ज़ाहिर हुए अगर सूर और सैदा में ज़ाहिर होते , तो वो टाट ओढ़कर और ख़ाक में बैठकर कब के तौबा कर लेते |""”
۱۴. मगर 'अदालत में सूर और सैदा का हाल तुम्हारे हाल से ज़्यादा बर्दाशत के लायक होगा |
۱۵. और तू ऐ कफ़र्नहूम, क्या तू आसमान तक बुलन्द किया जाएगा? नहीं, बल्कि तू 'आलम-ए-अर्वाह में उतारा जाएगा |
۱۶. “ ““जो तुम्हारी सुनता है वो मेरी सुनता है, और जो तुम्हें नहीं मानता वो मुझे नहीं मानता, और जो मुझे नहीं मानता वो मेरे भेजनेवाले को नहीं मानता |""”
۱۷. “ वो सत्तर खुश होकर फिर आए और कहने लगे, ““ऐ खुदावन्द, तेरे नाम से बदरूहें भी हमारे ताबे' हैं |""”
۱۸. “ उसने उनसे कहा, ““मैं शैतान को बिजली की तरह आसमान से गिरा हुआ देख रहा था |""”
۱۹. देखो, मैंने तुम को इख़्तियार दिया कि साँपों और बिच्छुओं को कुचलो और दुश्मन की सारी कुदरत पर ग़ालिब आओ, और तुम को हरगिज़ किसी चीज़ से नुक्सान न पहुंचेगा |
۲۰. “ तोभी इससे खुश न हो कि रूहें तुम्हारे ताबे' हैं बल्कि इससे खुश हो कि तुम्हारे नाम आसमान पर लिखे हुए है |""”
۲۱. “ उसी घड़ी वो रु-उल-कुद्दस से ख़ुशी में भर गया और कहने लगा, ““ऐ बाप ! आसमान और ज़मीन के खुदावन्द, में तेरी हम्द करता हूँ कि तूने ये बातें होशियारों और 'अक्लमन्दों से छिपाई और बच्चों पर ज़ाहिर कीं हाँ, ऐ, बाप क्यूँकि ऐसा ही तुझे पसंद आया |""”
۲۲. “ मेरे बाप की तरफ़ से सब कुछ मुझे सौंपा गया; और कोई नहीं जानता कि बेटा कौन है सिवा बाप के, और कोई नहीं जानता कि बाप कौन है सिवा बेटे के और उस शख्स के जिस पर बेटा उसे ज़ाहिर करना चाहे |""”
۲۳. “ और शागिर्दों की तरफ़ मूखातिब होकर खास उन्हीं से कहा, ““मुबारक है वो आँखें जो ये बातें देखती हैं जिन्हें तुम देखते हो |""”
۲۴. “ क्यूँकि मैं तुम से कहता हूँ कि बहुत से नबियों और बादशाहों ने चाहा कि जो बातें तुम देखते हो देखें मगर न देखी, और जो बातें तुम सुनते हो सुनें मगर न सुनीं |""”