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بائبل ایک سال میں
اپریل ۲۳

لوقا ۱۷:۱-۱۹
۱. “ फिर उसने अपने शागिर्दों से कहा, ““ये नहीं हो सकता कि ठोकरें न लगें, लेकिन उस पर अफ़सोस है कि जिसकी वजह से लगें |”
۲. इन छोटों में से एक को ठोकर खिलाने की बनिस्बत, उस शख्स के लिए ये बेहतर होता है कि चक्की का पाट उसके गले में लटकाया जाता और वो समुन्द्र में फेंका जाता |
۳. खबरदार रहो ! अगर तेरा भाई गुनाह करे तो उसे डांट दे, अगर वो तौबा करे तो उसे मु'आफ़ कर |
۴. “ और वो एक दिन में सात दफ़ा'' तेरा गुनाह करे और सातों दफा' तेरे पास फिर आकर कहे कि तौबा करता हूँ, तो उसे मु'आफ़ कर |""”
۵. “ इस पर रसूलों ने खुदावन्द से कहा, ““हमारे ईमान को बढ़ा |""”
۶. “ खुदावन्द ने कहा, ““अगर तुम में राई के दाने के बराबर भी ईमान होता और तुम इस तूत के दरख्त से कहते, कि जड़ से उखड़ कर समुन्द्र में जा लग, तो तुम्हारी मानता |”
۷. “ ““मगर तुम में ऐसा कौन है, जिसका नौकर हल जोतता या भेड़ें चराता हो, और जब वो खेत से आए तो उससे कहे, जल्द आकर खाना खाने बैठ !'”
۸. और ये न कहे, 'मेरा खाना तैयार कर, और जब तक मैं खाऊँ-पियूँ कमर बाँध कर मेरी ख़िदमत कर; उसके बा'द तू भी खा पी लेना'?
۹. क्या वो इसलिए उस नौकर का एहसान मानेगा कि उसने उन बातों को जिनका हुक्म हुआ ता'मील की?
۱۰. “ इसी तरह तुम भी जब उन सब बातों की, जिनका तुम को हुक्म हुआ ता'मील कर चुको, तो कहो, 'हम निकम्मे नौकर हैं जो हम पर करना फर्ज़ था वही किया है' |""”
۱۱. और अगर ऐसा कि यरूशलीम को जाते हुए वो सामरिया और गलील के बीच से होकर जा रहा था
۱۲. और एक गाँव में दाखिल होते वक़्त दस कोढ़ी उसको मिले |
۱۳. “ उन्होंने दूर खड़े होकर बुलन्द आवाज़ से कहा, ““ऐ ईसा' ! ऐ खुदा वंद ! हम पर रहम कर |”
۱۴. “ उसने उन्हें देखकर कहा, ““जाओ ! अपने आपको काहिनों को दिखाओ !"” और ऐसा हुआ कि वो जाते-जाते पाक साफ़ हो गए |”
۱۵. फिर उनमें से एक ये देखकर कि मैं शिफ़ा पा गया हूँ, बुलन्द आवाज़ से ख़ुदा की बड़ाई करता हुआ लौटा;
۱۶. और मुँह के बल ईसा' के पाँव पर गिरकर उसका शुक्र करने लगा; और वो सामरी था |
۱۷. ईसा' ने जवाब मे कहा ,”क्या दसों पाक साफ न हुए ; फिर वो नौ कहाँ है ?
۱۸. “ क्या इस परदेसी के सिवा और न निकले जो लौटकर खुदा की बड़ाई करते?"””
۱۹. “ फिर उससे कहा, ““उठ कर चला जा ! तेरे ईमान ने तुझे अच्छा किया है |""”