بائبل ایک سال میں


اپریل ۴


لوقا ۶:۱-۲۶
۱. फिर सबत के दिन यूँ हुआ कि वो खेतों में से होकर जा रहा था, और उसके शागिर्द बालें तोड़-तोड़ कर और हाथों से मल-मलकर खाते जाते थे |
۲. “ और फरीसियों में से कुछ लोग कहने लगे, ““तुम वो काम क्यूँ करते हो जो सबत के दिन करना ठीक नहीं |""”
۳. “ ईसा' ने जवाब में उनसे कहा, ““क्या तुम ने ये भी नहीं पढ़ा कि जब दाऊद और उसके साथी भूखे थे तो उसने क्या किया?"””
۴. “ वो क्यूँकर खुदा के घर में गया, और नज्र की रोटियाँ लेकर खाई जिनको खाना कहिनों के सिवा और किसी को ठीक नहीं, और अपने साथियों को भी दीं |""”
۵. “ फिर उसने उनसे कहा, ““इब्न-ए-आदम सबत का मालिक है |""”
۶. और यूँ हुआ कि किसी और सबत को वो 'इबादतखाने में दाखिल होकर ता'लीम देने लगा | वहाँ एक आदमी था जिसका दहिना हाथ सूख गया था |
۷. और आलिम और फरीसी उसकी ताक में थे, कि आया सबत के दिन अच्छा करता है या नहीं, ताकि उस पर इल्ज़ाम लगाने का मौका' पाएँ |
۸. “ मगर उसको उनके ख़याल मा'लूम थे; पस उसने उस आदमी से जिसका हाथ सुखा था कहा, ““उठ, और बीच में खड़ा हो !""”
۹. “ ईसा' ने उनसे कहा, ““मैं तुम से ये पूछता हूँ कि आया सबत के दिन नेकी करना ठीक है या बदी करना? जान बचाना या हलाक करना?"””
۱۰. “ और उन सब पर नज़र करके उससे कहा, ““अपना हाथ बढ़ा ! ““उसने बढ़ाया और उसका हाथ दुरुस्त हो गया |”
۱۱. वो आपे से बाहर होकर एक दुसरे से कहने लगे कि हम ईसा' के साथ क्या करें |
۱۲. और उन दिनों में ऐसा हुआ कि वो पहाड़ पर दु'आ करने को निकला और खुदा से दु'आ करने में सारी रात गुज़ारी |
۱۳. जब दिन हुआ तो उसने अपने शागिर्दों को पास बुलाकर उनमे से बारह चुन लिए और उनको रसूल का लकब दिया :
۱۴. या'नी शमा'ऊन जिसका नाम उसने पतरस भी रख्खा, और अन्द्रियास, और या'कूब, और युहन्ना, और फिलिप्पुस, और बरतुल्माई,
۱۵. और मत्ती, और तोमा, और हलफ़ई का बेटा या'क़ूब, और शमा'ऊन जो ज़ेलोतेस कहलाता था,
۱۶. और या'कूब का बेटा यहुदाह, और यहुदाह इस्करियोती जो उसका पकड़वाने वाला हुआ |
۱۷. और वो उनके साथ उतर कर हमवार जगह पर खड़ा हुआ, और उसके शागिर्दों की बड़ी जमा'अत और लोगों की बड़ी भीड़ वहाँ थी, जो सारे यहुदिया और यरूशलीम और सूर और सैदा के बहरी किनारे से उसकी सुनने और अपनी बीमारियों से शिफ़ा पाने के लिए उसके पास आई थी |
۱۸. और जो बदरूहों से दुख पाते थे वो अच्छे किए गए |
۱۹. और सब लोग उसे छूने की कोशिश करते थे, क्यूँकि कुव्वत उससे निकलती और सब को शिफ़ा बख्शती थी |
۲۰. “ फिर उसने अपने शागिर्दों की तरफ़ नज़र करके कहा, ““मुबारक हो तुम जो गरीब हो, क्यूँकि खुदा की बादशाही तुम्हारी है |””
۲۱. “ ““मुबारक हो तुम जो अब भूखे हो, क्यूँकि आसूदा होगे ““मुबारक हो तुम जो अब रोते हो, क्यूँकि हँसोगे”
۲۲. “ ““जब इब्न-ए-आदम की वज़ह से लोग तुम से 'दुश्मनी रख्खेंगे, और तुम्हें निकाल देंगे, और ला'न-ता'न करेंगे,"””
۲۳. “ ““उस दिन खुश होना और ख़ुशी के मारे उछलना, इसलिए कि देखो आसमान पर तुम्हारा अज्र बड़ा है; क्यूँकि उनके बाप-दादा नबियों के साथ भी ऐसा ही किया करते थे |”
۲۴. “ ““मगर अफ़सोस तुम पर जो दौलतमन्द हो, क्यूँकि तुम अपनी तसल्ली पा चुके |”
۲۵. “ ““अफ़सोस तुम पर जो अब सेर हो, क्यूँकि भूखे होगे | ““अफ़सोस तुम पर जो अब हँसते हो, क्यूँकि मातम करोगे और रोओगे |""”
۲۶. “ ““अफ़सोस तुम पर जब सब लोग तुम्हें अच्छा कहें, क्यूँकि उनके बाप-दादा झूटे नबियों के साथ भी ऐसा ही किया करते थे |”