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एक साल में बाइबल
सितंबर 4

1 कोरिन्‍थी 14:1-20
1. अहाँ सभ प्रेमक प्रेरणाक अनुसार चलबाक लेल प्रयत्‍नशील रहू आ आत्‍मिक वरदान सभक प्राप्‍तिक लेल उत्‍सुक रहू, विशेष रूप सँ परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पयबाक आ सुनयबाक वरदानक लेल।
2. किएक तँ जे अनजान भाषा मे बजैत अछि से मनुष्‍य सभ सँ नहि, बल्‍कि परमेश्‍वर सँ बजैत अछि। वास्‍तव मे ओकर बात केओ नहि बुझैत अछि। ओ परमेश्‍वरक आत्‍मा द्वारा रहस्‍यक बात सभ कहैत अछि।
3. मुदा जे परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पाबि सुनबैत अछि से लोकक आत्‍मिक वृद्धिक लेल आ ओकरा सभ केँ प्रोत्‍साहन आ सान्‍त्‍वना देबाक लेल बजैत अछि।
4. अनजान भाषा बजनिहार अपनहि आत्‍मिक वृद्धि करैत अछि मुदा परमेश्‍वर सँ पाओल सम्‍बाद सुनौनिहार मण्‍डलीक आत्‍मिक वृद्धि करैत अछि।
5. हम चाहितहुँ जे अहाँ सभ मे सँ सभ केँ अनजान भाषा सभ बजबाक वरदान भेटय, मुदा ताहि सँ बेसी ई चाहितहुँ जे अहाँ सभ मे सँ सभ केँ परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पयबाक आ सुनयबाक वरदान भेटय। जँ अनजान भाषा बाजऽ वला स्‍वयं अपन कहल बातक अर्थ नहि बुझा सकैत अछि तँ ओकरा सँ श्रेष्‍ठ ओ व्‍यक्‍ति अछि जे परमेश्‍वर सँ भेटल सम्‍बाद सुनबैत अछि, जाहि सँ मण्‍डलीक आत्‍मिक वृद्धि होअय।
6. यौ भाइ लोकनि, जँ हम अहाँ सभक ओतऽ आबि कऽ अनजान भाषा मे बाजी तँ जा धरि अहाँ सभ केँ हम अपना पर प्रगट कयल कोनो सत्‍य नहि सुनाबी, आ ने कोनो ज्ञानक बात, वा परमेश्‍वर सँ पाओल कोनो सम्‍बाद वा कोनो शिक्षाक बात कही, तँ ओहि सँ अहाँ सभ केँ की लाभ होयत?
7. तहिना बाँसुरी वा वीणा सनक निर्जीवो बाजा सँ जँ स्‍पष्‍ट धुनि नहि निकलत तँ के कहि सकत जे ओहि सँ की बजाओल जा रहल अछि?
8. फेर जँ सेनाक बिगुल सँ स्‍पष्‍ट आवाज नहि निकलत तँ कोन सैनिक अपना केँ लड़ाइक लेल तैयार करत?
9. एही तरहेँ अहूँ सभ, जँ बुझऽ वला भाषा मे नहि बाजब तँ जे बात बाजि रहल छी तकर अर्थ के बुझत? एना कऽ कऽ अहाँ सभ तँ हवा मे बात कयनिहार बनि जायब।
10. एहि संसार मे नहि जानि कतेक प्रकारक भाषा अछि, आ ओहि मे सँ एकोटा बिनु अर्थक नहि अछि।
11. जँ हम ककरो बाजल शब्‍दक अर्थ नहि बुझि पबैत छी तँ हम बजनिहारक लेल परदेशी छी आ बजनिहार हमरा लेल परदेशी अछि।
12. एहि तरहेँ अहूँ सभ, जे पवित्र आत्‍माक वरदान सभ पयबाक लेल उत्‍सुक छी, एही बातक लेल विशेष रूप सँ प्रयत्‍नशील रहू जे अहाँ सभक वरदानक उपयोगिता सँ मण्‍डलीक आत्‍मिक वृद्धि होअय।
13. एहि कारणेँ अनजान भाषा बजनिहार अपन कहल बातक अर्थ सेहो बुझा सकय, तकरा लेल ओ प्रभु सँ विनती करओ।
14. किएक तँ जँ हम अनजान भाषा मे प्रार्थना करैत छी तँ हमर आत्‍मा तँ प्रार्थना करैत अछि मुदा हमर बुद्धि कोनो काजक नहि होइत अछि।
15. तखन हम की करी? हम अपन आत्‍मा सँ प्रार्थना तँ करब मुदा अपन बुद्धि सँ सेहो प्रार्थना करब। हम अपन आत्‍मा सँ स्‍तुति गायब मुदा अपन बुद्धि सँ सेहो स्‍तुति गायब।
16. जँ अहाँ मात्र आत्‍मे सँ, ⌞अर्थात्‌ अनजान भाषा मे,⌟ परमेश्‍वरक स्‍तुति कऽ रहल छी तँ ओतऽ उपस्‍थित लोक सभ मे सँ, जे केओ बुझऽ वला नहि अछि, से अहाँक धन्‍यवादक प्रार्थनाक बाद कोना कहत जे “हँ, एहिना होअय” किएक तँ ओ नहि जनैत अछि जे अहाँ की कहि रहल छी।
17. अहाँ तँ धन्‍यवाद बहुत बढ़ियाँ सँ दैत छी मुदा ओहि सँ दोसर व्‍यक्‍तिक आत्‍मिक वृद्धि नहि भऽ रहल अछि।
18. हम परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद दैत छियनि जे हम अहाँ सभ गोटे सँ बढ़ि कऽ अनजान भाषा मे बजैत छी।
19. तैयो मण्‍डली मे अनजान भाषा मे दस हजार शब्‍द बजबाक अपेक्षा दोसर लोक सभ केँ शिक्षा देबाक लेल पाँचेटा बुझऽ वला शब्‍द बाजब नीक बुझैत छी।
20. यौ भाइ लोकनि, बच्‍चा जकाँ सोच-विचार कयनाइ छोड़ि दिअ। हँ, अधलाह बात मे छोट बच्‍चा बनल रहू, मुदा सोचऽ-विचारऽ मे सेयान बनू।