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एक साल में बाइबल
अगस्त 31

1 कोरिन्‍थी 11:1-16
1. जहिना मसीह जेना करैत छथि तेना हमहूँ करैत छी, तहिना हम जेना करैत छी तेना अहूँ सभ करू।
2. हम अहाँ सभक प्रशंसा करैत छी जे अहाँ सभ प्रत्‍येक बात मे हमर ध्‍यान रखैत छी आ हमरा सँ जे शिक्षा अहाँ सभ केँ भेटल अछि ताहि मे दृढ़ बनल रहैत छी।
3. मुदा हम चाहैत छी जे अहाँ सभ ई बुझी जे प्रत्‍येक पुरुषक ⌞प्रमुख, अर्थात्‌,⌟ “सिर”, मसीह छथि, स्‍त्रीक “सिर” पुरुष छथि आ मसीहक “सिर” परमेश्‍वर छथि।
4. कोनो पुरुष जे सिर झाँपि कऽ प्रार्थना करैत अछि वा परमेश्‍वर सँ भेटल सम्‍बाद सुनबैत अछि से अपन सिरक अपमान करैत अछि।
5. कोनो स्‍त्री जे सिर उघाड़ि कऽ प्रार्थना करैत अछि वा परमेश्‍वर सँ भेटल सम्‍बाद सुनबैत अछि से अपन सिरक अपमान करैत अछि किएक तँ ओ एहन बात होइत जेना ओ पूरा मूड़ीक केश छिलौने रहैत।
6. कारण, जँ स्‍त्री अपन सिर नहि झाँपय तँ ओ अपन केश कटबा लओ। मुदा जँ स्‍त्रीक लेल पूरा मूड़ीक केश कटौनाइ वा छिलौनाइ लाजक बात अछि तँ ओ अपन सिर झाँपओ।
7. पुरुष केँ अपन सिर नहि झँपबाक चाहिऐक, किएक तँ पुरुष परमेश्‍वरक प्रतिरूप आ हुनकर गौरव अछि। तहिना स्‍त्री पुरुषक गौरव अछि
8. किएक तँ स्‍त्री सँ पुरुष नहि बनाओल गेल, बल्‍कि पुरुष सँ स्‍त्री,
9. आ स्‍त्रीक लेल पुरुषक सृष्‍टि नहि भेल, बल्‍कि पुरुषक लेल स्‍त्रीक।
10. एहि कारणेँ, आ स्‍वर्गदूत सभक कारणेँ सेहो, स्‍त्रीगण सभ केँ अधिकारक चिन्‍ह केँ अपना सिर पर रखबाक चाही।
11. तैयो प्रभुक विधानक अनुसार स्‍त्री आ पुरुष दूनू एक-दोसर पर निर्भर रहैत अछि।
12. कारण, जहिना पुरुष सँ स्‍त्रीक सृष्‍टि भेल तहिना पुरुषक जन्‍म स्‍त्री सँ होइत अछि आ सभ बातक मूलस्रोत परमेश्‍वरे छथि।
13. अहीं सभ विचार करू—की ई उचित अछि जे स्‍त्री बिनु सिर झँपने परमेश्‍वर सँ प्रार्थना करय?
14. जे स्‍वभाविक बात सभ अछि, की ताहि सँ अहाँ सभ केँ ई शिक्षा नहि भेटैत अछि जे पुरुषक लेल लम्‍बा केश रखनाइ लाजक बात अछि?
15. मुदा स्‍त्रीक लेल लम्‍बा केश ओकर शोभा छैक। किएक तँ ओकर झापनक रूप मे ओकरा लम्‍बा केश देल गेल छैक।
16. मुदा जँ केओ एहि विषय मे विवाद करऽ चाहय तँ ओ ई जानि लओ जे ने तँ हमरा सभक बीच कोनो दोसर प्रथा प्रचलित अछि आ ने परमेश्‍वरक मण्‍डली सभ मे।