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एक साल में बाइबल
अगस्त 26

1 कोरिन्‍थी 7:20-40
20. हरेक व्‍यक्‍ति जाहि स्‍थिति मे परमेश्‍वर द्वारा बजाओल गेल छल, ओ ताही मे रहओ।
21. की अहाँ बजाओल जयबाक समय मे ककरो गुलाम छलहुँ? कोनो चिन्‍ता नहि करू—ओना तँ जँ स्‍वतन्‍त्र भेनाइ सम्‍भव भऽ जाय तँ अवसर सँ फायदा लिअ।
22. हँ, कोनो चिन्‍ता नहि करू, किएक तँ जे गुलाम भऽ कऽ प्रभु मे अयबाक लेल बजाओल गेल से प्रभुक स्‍वतन्‍त्र कयल व्‍यक्‍ति भऽ गेल अछि। तहिना जे व्‍यक्‍ति स्‍वतन्‍त्र रहि कऽ बजाओल गेल से मसीहक गुलाम भऽ गेल अछि।
23. अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी, आब मनुष्‍यक गुलाम नहि बनू।
24. यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति जाहि स्‍थिति मे प्रभु लग बजाओल गेलहुँ, परमेश्‍वरक संग ताही मे रहू।
25. कुमार और कुमारि सभक विषय मे प्रभुक दिस सँ हमरा कोनो आदेश नहि भेटल अछि, तैयो प्रभुक दया सँ विश्‍वासयोग्‍य रहि हम अपन विचार दऽ रहल छी।
26. हमर विचार अछि जे आइ-काल्‍हिक समयक कठिन परिस्‍थिति मे कोनो मनुष्‍यक लेल यैह नीक अछि जे ओ जाहि स्‍थिति मे अछि ताही स्‍थिति मे रहय।
27. की अहाँ केँ स्‍त्री छथि? अहाँ हुनका सँ मुक्‍त होयबाक प्रयत्‍न नहि करू। की अहाँ केँ स्‍त्री नहि अछि? तँ अहाँ विवाह करबाक प्रयत्‍न नहि करू।
28. मुदा जँ अहाँ विवाह करी तँ एहि मे कोनो पाप नहि अछि आ जँ कोनो कुमारि विवाह करय तँ ओ पाप नहि करैत अछि। मुदा जे सभ विवाह करत तकरा सभ केँ सांसारिक जीवन मे कष्‍ट सहऽ पड़तैक आ हम अहाँ सभ केँ ओहि सँ बँचाबऽ चाहैत छी।
29. यौ भाइ लोकनि, हमर कहबाक अर्थ ई अछि जे समय थोड़बे रहि गेल अछि। आब जकरा स्‍त्री अछि से एना रहओ जेना स्‍त्री नहि होअय।
30. जे कनैत अछि से एना रहओ जेना नहि कनैत होअय। जे आनन्‍द मनबैत अछि से एना रहओ जेना आनन्‍द नहि मनबैत होअय। जे चीज-वस्‍तु मोल लैत अछि से एना रहओ जेना ओ चीज ओकर नहि होइक।
31. जे संसारक चीज-वस्‍तुक उपभोग करैत अछि से एना रहओ जेना ओहि मे लिप्‍त नहि भऽ गेल होअय, किएक तँ ई संसार जे देखैत छी से समाप्‍त भऽ रहल अछि।
32. हम चाहैत छी जे अहाँ सभ चिन्‍ता-मुक्‍त रहू। अविवाहित पुरुष ई सोचैत प्रभुक सेवा मे व्‍यस्‍त रहैत अछि जे “प्रभु केँ कोना प्रसन्‍नता भेटतनि?”
33. मुदा विवाहित पुरुष ई सोचैत सांसारिक बात सभ मे व्‍यस्‍त रहैत अछि जे, “स्‍त्री केँ कोना प्रसन्‍न करी?”
34. एहन मनुष्‍यक मोन दू दिस लागल रहैत छैक। जकरा पति नहि छैक वा जे कुमारि अछि, से एहि इच्‍छा सँ प्रभुक बात पर ध्‍यान रखैत अछि जे अपना केँ पूर्ण रूप सँ, तन-मन सँ, प्रभु केँ अर्पण करी। मुदा विवाहिता केँ सांसारिक बात सभक चिन्‍ता रहैत छैक जे अपना पति केँ कोना प्रसन्‍न राखी।
35. हम अहाँ सभ केँ ई बात स्‍वतन्‍त्रता पर रोक लगयबाक लेल नहि कहि रहल छी, बल्‍कि अहाँ सभक भलाइक लेल, जाहि सँ अहाँ सभ उचित ढंग सँ रहैत बाधा सँ बाँचि कऽ पूरा मोन सँ प्रभुक सेवाक लेल समर्पित होइ।
36. मुदा जँ ककरो ई बुझाइत होइक जे विवाह नहि कयला सँ ओ अपन विवाहक लेल ठीक कयल गेल लड़कीक लेल उचित नहि कऽ रहल अछि आ आत्‍मसंयम कयनाइ सेहो कठिन भऽ रहल छैक, आ ई बुझैत होअय जे विवाह कयनाइ उचित होइत, तँ ओ जेना करऽ चाहैत अछि, तेना करय—ओ सभ विवाह कऽ लय। एहि मे पाप नहि अछि।
37. मुदा जकर मोन एहि विषय मे स्‍थिर भऽ गेल छैक, आ कोनो तरहेँ बाध्‍य नहि अछि, बल्‍कि अपन इच्‍छाक अनुसार चलबाक अधिकारी अछि, आ अपना लेल ठीक भेल कुमारिक संग विवाह नहि करबाक निश्‍चय कऽ लेने अछि, सेहो ठीक करैत अछि।
38. एहि तरहेँ जे अपना लेल ठीक भेल कुमारिक संग विवाह करैत अछि से ठीक करैत अछि, मुदा जे विवाह नहि करैत अछि से आरो ठीक करैत अछि।
39. जाबत धरि कोनो स्‍त्रीक पति जीवित अछि ताबत धरि ओ अपन पतिक संग विवाहक बन्‍हन मे बान्‍हल अछि। मुदा पतिक मृत्‍यु भऽ गेला पर ओ स्‍वतन्‍त्र भऽ जाइत अछि आ जकरा सँ चाहय विवाह कऽ सकैत अछि, मुदा आवश्‍यक ई अछि जे विवाह प्रभुक लोक सँ होअय ।
40. तैयो जँ ओ ओहिना रहि जाय तँ आरो आनन्‍दित रहत। ई हमर विचार अछि, आ हमरा विश्‍वास अछि जे परमेश्‍वरक आत्‍मा हमरो संग छथि।