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एक साल में बाइबल
अगस्त 12

रोमी 11:19-36
19. आब अहाँ सभ कहब जे, “ठाढ़ि सभ केँ एहि लेल काटल गेल जे हमरा सभ केँ कलम लगाओल जाय।”
20. मानलहुँ। मुदा हुनका सभ केँ अविश्‍वासेक कारणेँ काटि कऽ अलग कयल गेलनि, आ अहाँ सभ विश्‍वासक कारण अपन स्‍थान पर स्‍थिर छी। तेँ अहंकार नहि करू, बल्‍कि भय मानू।
21. किएक तँ जखन परमेश्‍वर मूल ठाढ़ि केँ नहि छोड़लनि तँ ओ अहूँ सभ केँ नहि छोड़ताह।
22. तेँ परमेश्‍वरक दया आ कठोरता, दूनू पर ध्‍यान राखू—कठोरता तकरा सभ पर अछि जकरा सभक पतन भऽ गेल छैक, मुदा अहाँ सभक लेल हुनकर दया अछि, लेकिन से तखने जखन अहाँ सभ हुनकर दयाक शरण मे रहब; नहि तँ अहूँ सभ काटि कऽ अलग कऽ देल जायब।
23. एही तरहेँ जँ ओहो सभ अपन अविश्‍वास मे जिद्दी बनल नहि रहताह तँ हुनको सभ केँ कलम लगाओल जयतनि। किएक तँ परमेश्‍वर सामर्थ्‍यवान छथि जे हुनका सभ केँ फेर कलम लगा लेथि।
24. कारण, जखन अहाँ सभ जंगली जैतूनक गाछ सँ काटल जा कऽ प्रकृतिक विपरीत एक नीक गाछ मे कलम लगाओल गेलहुँ, तँ जे नीक जैतूनक असली ठाढ़ि अछि से किएक नहि अपन गाछ मे आसानी सँ कलम लगाओल जायत?
25. यौ भाइ लोकनि, कतौ एहन नहि होअय जे अहाँ सभ अपना केँ बहुत बुद्धिमान बुझी। तेँ हम अहाँ सभ केँ ई सत्‍य, जे पहिने गुप्‍त छल, से बुझाबऽ चाहैत छी जे, इस्राएलक अधिकांश लोक जे जिद्दी बनल अछि, से बात सभ दिन तक नहि रहत, बल्‍कि तहिये तक जहिया तक परमेश्‍वरक चुनल गैर-यहूदी लोकक पूर्ण संख्‍याक प्रवेश नहि भऽ जाइत अछि।
26. और एहि तरहेँ सम्‍पूर्ण इस्राएलक उद्धार होयत, जेना कि धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, “सियोन सँ मुक्‍तिदाता औताह। ओ याकूबक वंश सँ अधर्म हटौताह।
27. प्रभु-परमेश्‍वर कहैत छथि जे, हम जखन ओकरा सभक पाप हरि लेब, तँ हम ओकरा सभ केँ देल अपन एहि वचन केँ पूरा करब।”
28. शुभ समाचार केँ अस्‍वीकार करबाक कारणेँ यहूदी सभ परमेश्‍वरक शत्रु ठहरि गेल छथि, जे अहाँ सभक लेल हितक बात भेल, मुदा परमेश्‍वर हुनका सभक पूर्वज लोकनि केँ चुनने छलाह, आ तेँ पूर्वज सभ केँ देल वचनक कारणेँ ओ सभ परमेश्‍वरक प्रिय प्रजा छथि।
29. कारण, परमेश्‍वर जखन ककरो बजयबाक वा किछु देबाक निर्णय करैत छथि तँ ओ अपन निर्णय बदलैत नहि छथि।
30. जहिना पहिने अहाँ सभ परमेश्‍वरक अनाज्ञाकारी छलहुँ मुदा आब यहूदी सभ केँ अनाज्ञाकारी होयबाक कारणेँ अहाँ सभ पर दया कयल गेल अछि,
31. तहिना यहूदी सभ एखन अनाज्ञाकारी छथि जाहि सँ ओहि दयाक कारणेँ जे अहाँ सभ पर कयल गेल, हुनको सभ पर आब दया कयल जानि।
32. किएक तँ परमेश्‍वर सभ केँ अनाज्ञाकारिताक बन्‍हन मे बान्‍हि लेने छथि जाहि सँ सभ पर ओ कृपा करथि।
33. अहा! परमेश्‍वरक वैभव, बुद्धि आ ज्ञान केहन अपरम्‍पार छनि! हुनकर निर्णयक गहिंराइ आ हुनकर काज करबाक तरीका के बुझि सकैत अछि?
34. जेना कि धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, “प्रभुक मोन के जनलक अछि? हुनकर सल्‍लाहकार के भऽ सकल अछि?”
35. “परमेश्‍वर केँ के कहियो किछु देने अछि जे ओ बदला मे किछु पयबाक दावा कऽ सकय?”
36. सभ किछु तँ हुनका सँ, हुनका द्वारा आ हुनका लेल अछि। हुनकर स्‍तुति युगानुयुग होइत रहनि! आमीन।