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एक साल में बाइबल
जुलाई 22

मसीह-दूत 23:1-15
1. पौलुस धर्म-महासभाक दिस एकटक लगा कऽ देखलनि आ बजलाह, “भाइ लोकनि, हम जाहि तरहेँ आजुक दिन धरि अपन जीवन व्‍यतीत कयने छी, ताहि सम्‍बन्‍ध मे हम अपना केँ परमेश्‍वरक नजरि मे निर्दोष बुझैत छी।”
2. एहि पर महापुरोहित हननियाह पौलुसक लग मे ठाढ़ लोक सभ केँ आदेश देलथिन जे, मारू ओकरा मुँह पर थप्‍पड़।
3. तखन पौलुस हुनका कहलथिन, “यौ चुनक-पोतल देवाल, परमेश्‍वर अहीं केँ मारताह! अहाँ धर्म-नियमक अनुसार हमर न्‍याय करबाक लेल एतऽ बैसल छी, और अहाँ अपने धर्म-नियमक विरोध मे हमरा मारबाक लेल आज्ञा दैत छिऐक!”
4. पौलुसक लग ठाढ़ लोक सभ हुनका कहलकनि, “की अहाँ परमेश्‍वरक ठहराओल महापुरोहित केँ अपमानित करैत छियनि?”
5. पौलुस उत्तर देलथिन, “भाइ लोकनि, हमरा नहि बुझल छल जे ई महापुरोहित छथि। धर्मशास्‍त्रक लेख अछि, ‘तोँ अपन समाजक शासक केँ अपशब्‍द नहि कहबह।’ ”
6. पौलुस जनैत छलाह जे उपस्‍थित लोक सभ मे सदुकी आ फरिसी दूनू पंथक लोक अछि, आ तेँ ओ सभा मे बाजऽ लगलाह, “भाइ लोकनि, हम फरिसी छी, आ फरिसीक पुत्र छी। हमर न्‍याय एखन एहि लेल कयल जा रहल अछि जे हमर विश्‍वासपूर्ण आशा अछि जे मुइल सभ फेर जिआओल जायत।”
7. हुनकर ई बात सुनिते, फरिसी आ सदुकी सभ अपने मे झगड़ा करऽ लगलाह, आ सभा मे फूट पड़ि गेल।
8. कारण, सदुकी सभक कथन अछि जे मुइल सभ नहि जिआओल जायत, और ने स्‍वर्गदूत अछि आ ने कोनो तरहक आत्‍मा होइत अछि, मुदा फरिसी सभ एहि तीनू बात केँ मानैत अछि।
9. तँ एहि तरहेँ बड़का हल्‍ला मचि गेल। फरिसी पंथक किछु धर्मशिक्षक सभ उठि बहुत जोर दऽ कऽ कहऽ लगलाह, “हम सभ एहि व्‍यक्‍ति मे कोनो खराबी नहि देखैत छी। आ मानि लिअ जे एकरा सँ कोनो स्‍वर्गदूत वा आत्‍मा बात कयने होथि, तखन?”
10. ई झगड़ा ततेक ने बढ़ि गेल जे सेनापति केँ डर होमऽ लगलनि जे, कतौ ई सभ पौलुस केँ टुकड़ा-टुकड़ा नहि कऽ दैक। तेँ ओ सैनिक सभ केँ आज्ञा देलथिन जे सभा मे जा कऽ ओकरा जबरदस्‍ती छोड़ाबह आ गढ़ मे लऽ आनह।
11. ओही राति प्रभु पौलुसक लग मे ठाढ़ भऽ कऽ कहलथिन, “साहस राखह! जहिना तोँ यरूशलेम मे हमरा विषय मे गवाही देलह, तहिना रोम मे सेहो तोरा गवाही देबाक छह।”
12. भोर भेला पर यहूदी सभ षड्‌यन्‍त्र रचलक आ सपत खयलक जे, जा धरि पौलुस केँ जान सँ नहि मारि देब, ता धरि किछु नहि खायब-पीब।
13. ई षड्‌यन्‍त्र रचनिहार सभ चालिस सँ बेसी गोटे छल।
14. ओ सभ मुख्‍यपुरोहित सभ आ बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोकनि लग जा कऽ कहलकनि, “हम सभ भारी सपत खयलहुँ जे, जा धरि पौलुस केँ मारि नहि देब, ता धरि किछु नहि खायब-पीब।
15. तेँ अहाँ सभ धर्म-महासभाक संग मिलि कऽ सेनापति सँ निवेदन करू जे ओ पौलुस केँ एम्‍हर लऽ अबथि, एहि बहाना सँ जे हम सभ ओकर आरो ठीक सँ जाँच करऽ चाहैत छी। और हम सभ जे छी, से ओकरा एतऽ पहुँचऽ सँ पहिनहि ओकरा मारि देबाक लेल तैयार रहब।”