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एक साल में बाइबल
फरवरी 28

मरकुस 6:30-56
30. पठाओल गेल दूत सभ यीशु लग फिरि कऽ अयला पर, जे काज ओ सभ कयने छलाह और जे शिक्षा देने छलाह, से सभ बात यीशु केँ कहि सुनौलथिन।
31. हुनका सभ लग ततेक लोक अबैत-जाइत छल जे हुनका सभ केँ भोजनो करबाक फुरसति नहि भेटैत छलनि। तखन यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “आउ! अपना सभ कोनो एकान्‍त स्‍थान मे जा कऽ भीड़ सँ अलग किछु आराम करी।”
32. ओ सभ नाव मे बैसि कऽ एकान्‍त स्‍थानक लेल विदा भऽ गेलाह
33. मुदा बहुत लोक हुनका सभ केँ जाइत देखलकनि और चिन्‍हि गेलनि। लोक सभ, नगर-नगर सँ निकलि हुनका सभक पाछू झीलक कछेरे-कछेर दौड़ल आ हुनका सभ सँ पहिने ओतऽ पहुँचि गेल।
34. यीशु जखन नाव सँ उतरलाह आ लोकक बड़का भीड़ केँ जमा देखलनि तँ हुनका ओहि लोक सभ पर दया आबि गेलनि किएक तँ ओ सभ एहन भेँड़ी जकाँ छल जकर केओ चरबाह नहि होइक। यीशु ओकरा सभ केँ बहुत बात सिखाबऽ लगलथिन।
35. जखन साँझ पड़ऽ लागल तँ हुनकर शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कहलथिन, “ई स्‍थान बस्‍ती सँ दूर अछि और साँझ पड़ऽ वला छैक।
36. लोक सभ केँ एखन जाय दिऔक जाहि सँ लगक गाम-बजार सँ अपना लेल किछु खयबाक वस्‍तु किनि सकत।”
37. मुदा यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहीं सभ एकरा सभ केँ भोजन करबिऔक।” शिष्‍य सभ हुनका कहलथिन जे, “तकरा लेल तँ दू सय दिनार लगैत। की हम सभ ओतेक खर्च कऽ कऽ रोटी आनि कऽ एकरा सभ केँ खुअबिऔक?”
38. यीशु हुनका सभ केँ जबाब देलथिन जे, “अहाँ सभ जा कऽ देखू जे अहाँ सभ लग कयटा रोटी अछि।” ओ सभ देखि कऽ हुनका कहलथिन जे, “पाँचटा रोटी आ दूटा माछ।”
39. तखन यीशु सभ लोक केँ हरियर घास पर पाँति-पाँति मे बैसयबाक आज्ञा शिष्‍य सभ केँ देलथिन।
40. लोक सभ सय-सय आ पचास-पचासक पाँति मे बैसैत गेल।
41. यीशु ओहि पाँचटा रोटी और दूटा माछ केँ हाथ मे लऽ कऽ, स्‍वर्ग दिस तकैत परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि। ओ रोटी केँ तोड़ि-तोड़ि, लोक सभ मे परसबाक लेल शिष्‍य सभ केँ देलथिन। तखन ओहि दूटा माछो केँ हुनका सभ केँ लोक सभ मे परसबाक लेल देलथिन।
42. सभ केओ भरि इच्‍छा भोजन कयलक।
43. शिष्‍य सभ जखन रोटी आ माछक उबरल टुकड़ी सभ बिछलनि तँ बारह छिट्टा भेल।
44. भोजन करऽ वला मे मात्र पुरुषक संख्‍या पाँच हजार छल।
45. तकरबाद यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ तुरत नाव पर चढ़ि कऽ अपना सँ पहिने झीलक ओहि पार बेतसैदा नगर चल जयबाक लेल आज्ञा देलथिन आ अपने ओतहि रहि कऽ भीड़क लोक सभ केँ विदा करऽ लगलाह।
46. ओकरा सभ केँ विदा करा कऽ ओ प्रार्थना करऽ लेल पहाड़ पर चल गेलाह।
47. साँझ बितला पर नाव झीलक बीच मे छलैक और यीशु किनार पर असगरे छलाह।
48. ओ देखलनि जे शिष्‍य सभ केँ नाव खेबऽ मे बहुत परिश्रम भऽ रहल छनि, किएक तँ हवा विपरीत दिस सँ बहि रहल छलैक। लगभग रातिक चारिम पहर मे ओ झीलक पानि पर चलैत हुनका सभक दिस गेलाह। यीशु हुनका सभ सँ आगू बढ़ि जाय चाहैत छलाह।
49. शिष्‍य सभ हुनका पानि पर चलैत देखि, हुनका भूत बुझि चिचियाय लगलाह।
50. सभ गोटे हुनका देखि भयभीत भऽ गेलाह। मुदा यीशु हुनका सभ केँ तुरत कहलथिन, “साहस राखू! हम छी! नहि डेराउ!”
51. ओ हुनका सभक संग नाव मे चढ़ि गेलाह और हुनका चढ़िते अन्‍हड़-बिहारि थम्‍हि गेल। शिष्‍य सभ एकदम अवाक भऽ गेलाह
52. किएक तँ ओ सभ रोटी वला घटना सेहो नहि बुझि सकल छलाह—हुनका सभक बुद्धि बन्‍द छलनि।
53. ओ सभ झील केँ पार कऽ कऽ गन्‍नेसरत क्षेत्र मे पहुँचलाह और नाव केँ किनार लगा देलनि।
54. जखन यीशु नाव पर सँ उतरलाह तखन लोक सभ हुनका चिन्‍हि लेलकनि।
55. लोक सभ पूरा क्षेत्र मे जा कऽ रोगी सभ केँ खाट पर लादि जाहि ठाम लोक कहैत छल जे यीशु छथि ओहि ठाम रोगी सभ केँ पहुँचाबऽ लागल।
56. जाहि गाम, शहर, अथवा बस्‍ती मे ओ जाइत छलाह ताहि ठामक लोक रोगी सभ केँ हाट-बजार मे सुता दैत छल। ओ सभ यीशु सँ प्रार्थना करैत छल जे, “अहाँ अपन कपड़ाक खूटो रोगी सभ केँ छुबऽ दिऔक।” जे सभ हुनकर कपड़ा छुलक से सभ स्‍वस्‍थ भऽ गेल।