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मरकुस 4:1-20
1. दोसर बेर यीशु फेरो झीलक कात मे लोक सभ केँ शिक्षा देबऽ लगलाह। हुनका लग ततेक लोक जमा भऽ गेल जे ओ झील मे नाव पर चढ़ि कऽ किनार सँ कनेक हटि कऽ बैसि गेलाह। लोक सभ किनार पर सँ हुनकर शिक्षा सुनैत छल।
2. ओकरा सभ केँ ओ बहुत बात दृष्‍टान्‍त सभक द्वारा सिखबैत छलथिन।
3. एहि बेर उपदेश दैत ओ कहलथिन, “सुनू! एक किसान बीया बाउग करबाक लेल गेल।
4. बीया बाउग करैत काल किछु बीया रस्‍ताक कात मे खसल आ चिड़ै सभ आबि ओकरा खा लेलकैक।
5. किछु बीया पथराह जमीन पर खसल जतऽ बेसी माटि नहि होयबाक कारणेँ ओ जल्‍दी जनमि गेल।
6. मुदा रौद लगिते ओ झरकि गेल आ जड़ि नहि पकड़ि सकबाक कारणेँ सुखा गेल।
7. फेर दोसर बीया काँट-कुशक बीच मे खसल मुदा काँट-कुश बढ़ि कऽ ओकरा दबा देलकैक। तेँ ओहि बीया सँ कोनो फसिल नहि भेलैक।
8. किछु बीया नीक जमीन पर पड़ल। ओ जनमि कऽ फड़ल-फुलायल और फसिल देलक—कोनो तीस गुना, कोनो साठि गुना, कोनो सय गुना।”
9. तखन यीशु कहलथिन, “जकरा सुनबाक कान छैक, से सुनओ।”
10. बाद मे जखन यीशु अपन बारह शिष्‍य आ आरो संगी सभक संग एकान्‍त मे छलाह तखन ओ सभ एहि दृष्‍टान्‍तक बारे मे हुनका सँ पुछलथिन।
11. यीशु कहलथिन, “परमेश्‍वरक राज्‍यक रहस्‍यक ज्ञान अहाँ सभ केँ देल गेल अछि, मुदा जे बाहरक लोक अछि तकरा सभक लेल सभ बात दृष्‍टान्‍तक रूप मे रहैत छैक,
12. जाहि सँ, जहिना लिखल अछि, ‘तकितो ओ सभ देखय नहि, सुनितो ओ सभ बुझय नहि। एना जँ नहि रहैत तँ ओ सभ घुमि कऽ परमेश्‍वर लग अबैत और क्षमा पबैत।’ ”
13. तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “जँ अहाँ सभ एहि दृष्‍टान्‍तक अर्थ नहि बुझैत छिऐक तँ आरो दृष्‍टान्‍तक अर्थ कोना बुझबैक?
14. बाउग करऽ वला परमेश्‍वरक वचन केँ बाउग करैत अछि।
15. रस्‍ताक कात मे खसल बीया जकाँ ओ व्‍यक्‍ति अछि जकरा मे परमेश्‍वरक वचन बाउग कएल गेल छैक, और जखने ओ वचन सुनैत अछि तखने शैतान आबि कऽ ओकरा मे सँ बाउग कएल गेल वचन निकालि कऽ लऽ जाइत छैक।
16. तहिना दोसर आदमी ओहि बीया जकाँ अछि जे पथराह जमीन पर बाउग कएल गेल अछि। ई सभ परमेश्‍वरक वचन सुनि कऽ अपार आनन्‍दक संग तुरत ओकरा स्‍वीकार करैत अछि,
17. मुदा ओ वचन ओकरा मे जड़ि नहि पकड़ैत छैक और तेँ कनेके काल तक स्‍थिर रहैत अछि। जखन वचनक कारणेँ ओकरा कष्‍ट और अत्‍याचार सहबाक स्‍थिति अबैत छैक तखन ओ सभ तुरत विश्‍वास केँ छोड़ि दैत अछि।
18. फेर दोसर आदमी ओहि बीया जकाँ अछि जे काँट-कुशक बीच खसल। ई सभ वचन तँ सुनैत अछि
19. मुदा एहि संसारक चिन्‍ता, धनक मोह-माया आ आरो चीजक लालसा हृदय मे आबि कऽ वचन केँ दबा दैत छैक और ओ वचन ओकरा जीवन मे कोनो फल नहि दैत अछि।
20. नीक जमीन मे बाउग कयल गेल बीया जकाँ ओ सभ अछि जे वचन केँ सुनि कऽ ओकरा स्‍वीकार करैत अछि और फड़ि-फुला कऽ फसिल दैत अछि—केओ तीस गुना, केओ साठि गुना, केओ सय गुना।”