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एक साल में बाइबल
नवंबर 3

तीतुस 3:1-15
1. मण्‍डलीक लोक केँ स्‍मरण करबैत रहू जे ओ सभ शासक सभक आ अधिकारी सभक अधीन रहथि, आज्ञाकारी होथि, सभ तरहक नीक काज करबाक लेल तत्‍पर रहथि,
2. ककरो बदनामी नहि करथि, झगड़ा नहि करथि, विचारशील होथि आ सदिखन सभक संग नम्र व्‍यवहार करथि।
3. किएक तँ अपनो सभ पहिने निर्बुद्धि, आज्ञा उल्‍लंघन करऽ वला और भटकल छलहुँ, आ विभिन्‍न प्रकारक शारीरिक इच्‍छा आ भोग-विलासक अभिलाषा सभक गुलाम छलहुँ। अपनो सभ दुष्‍टता आ ईर्ष्‍या सँ भरल जीवन बितबैत छलहुँ। अपना सभ सँ घृणा कयल जाइत छल आ अपनो सभ एक-दोसर सँ घृणा करैत छलहुँ।
4. मुदा जखन अपना सभक उद्धारकर्ता-परमेश्‍वरक दया आ प्रेम प्रगट भेल,
5. तँ ओ अपना सभक उद्धार कयलनि। ई उद्धार अपना सभक अपन कयल कोनो धर्मक काज सभक आधार पर नहि, बल्‍कि हुनकर दयाक कारणेँ भेल। अर्थात्‌, परमेश्‍वर अपना सभ केँ धो कऽ नव जन्‍म देलनि, अपन पवित्र आत्‍मा द्वारा अपना सभ केँ नव बनौलनि।
6. ओ ओहि पवित्र आत्‍मा केँ अपना सभक उद्धारकर्ता यीशु मसीहक माध्‍यम सँ प्रशस्‍त मात्रा मे अपना सभ केँ प्रदान कयलनि,
7. जाहि सँ हुनकर कृपा द्वारा धार्मिक ठहराओल जा कऽ अपना सभ ओहि अनन्‍त जीवनक उत्तराधिकारी होइ, जकर अपना सभ केँ आशा अछि।
8. ई बात एकदम सत्‍य अछि आ हम चाहैत छी जे अहाँ एहि बात सभ पर जोर दी, जाहि सँ जे सभ परमेश्‍वर पर विश्‍वास कयने छथि से सभ नीक काज सभ मे लागल रहबाक लेल ध्‍यान देथि। ई बात सभ अति उत्तम आ सभ लोकक लेल कल्‍याणकारी अछि।
9. मुदा निरर्थक वाद-विवाद, वंशावली सम्‍बन्‍धी बात आ धर्म-नियम सम्‍बन्‍धी झगड़ा और बतकटौअलि सभ सँ बँचू, किएक तँ एहि सभ सँ कोनो लाभ नहि अछि; ई सभ बेकार अछि।
10. जे केओ अहाँ सभक बीच मे फूट कराबय तकरा चेतावनी दिऔक। जँ दोसरो बेरक चेतावनीक बाद नहि मानैत होअय तँ ओकरा सँ कोनो सम्‍बन्‍ध नहि राखू,
11. ई जानि जे एहन व्‍यक्‍ति पथभ्रष्‍ट भऽ गेल अछि आ पाप करिते रहैत अछि। ओ स्‍वयं अपना केँ दोषी ठहरा लेने अछि।
12. हम जखन अरतिमास वा तुखिकुस केँ अहाँक ओतऽ पठायब तँ अहाँ निकुपुलिस नगर मे हमरा लग जल्‍दी अयबाक प्रयत्‍न करब। हम ओतहि जाड़क समय व्‍यतीत करबाक निश्‍चय कयने छी।
13. जेनास वकील आ अपुल्‍लोसक यात्राक लेल नीक सँ प्रबन्‍ध करबाक कोशिश करू जाहि सँ हुनका सभ केँ कोनो बातक कमी नहि होनि।
14. अपना सभक लोक सभ केँ सेहो नीक काज मे लागल रहनाइ सिखऽ पड़तनि जाहि सँ ओ सभ वास्‍तविक आवश्‍यकता सभक पूर्ति कऽ सकथि आ निष्‍फल जीवन नहि बितबथि।
15. एहिठामक हमरा संगक सभ लोक अहाँ केँ नमस्‍कार पठबैत छथि। हमरा सभ सँ प्रेम करऽ वला ओहूठामक विश्‍वासी सभ केँ हमर नमस्‍कार कहि दिऔन। अहाँ सभ गोटे पर परमेश्‍वरक कृपा बनल रहय।