A A A A A
एक साल में बाइबल
अक्टूबर 4

इफिसी 5:17-33
17. तेँ एहन लोक नहि बनू जे बिनु सोचि-विचारि कऽ काज करैत अछि, बल्‍कि प्रभुक इच्‍छा की अछि, से बुझू।
18. दारू पिबि कऽ मतवाला नहि होउ, किएक तँ मतवालापन मात्र दुराचार वला मार्ग पर लऽ जाइत अछि, बल्‍कि परमेश्‍वरक आत्‍मा सँ परिपूर्ण होउ।
19. आपस मे भजन, स्‍तुति-गान और भक्‍तिक गीत गबैत रहू। अपना मोनो मे प्रभुक लेल गीत गबैत-बजबैत रहू,
20. और अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक माध्‍यम सँ हरदम सभ बातक लेल परमेश्‍वर पिता केँ धन्‍यवाद दिऔन।
21. मसीहक लेल श्रद्धा-भय रखबाक कारणेँ एक-दोसराक अधीन रहू।
22. हे स्‍त्री सभ, अहाँ सभ जहिना प्रभुक अधीन मे रहैत छी, तहिना अपना-अपना पतिक अधीन मे रहू।
23. कारण, जाहि तरहेँ मसीह अपन शरीरक, अर्थात्‌ मण्‍डलीक, सिर छथि और ओकर मुक्‍तिदाता छथि, तहिना पति अपन स्‍त्रीक उपर, अर्थात् ओकर सिर, अछि।
24. तँ जाहि तरहेँ मण्‍डली मसीहक अधीन रहैत अछि, ताहि तरहेँ स्‍त्री सभ केँ सभ बात मे अपना-अपना पतिक अधीन रहबाक छैक।
25. यौ पति लोकनि, ओहि तरहेँ अपना स्‍त्री सँ प्रेम करू जाहि तरहेँ मसीह मण्‍डली सँ कयलनि और ओकरा लेल अपना केँ अर्पित कऽ देलनि,
26. जाहि सँ ओ ओकरा जल सँ धो कऽ वचन द्वारा शुद्ध करैत ओकरा पवित्र कऽ सकथि।
27. ई बात ओ एहि लेल कयलनि जाहि सँ ओ अपना सामने मण्‍डली केँ एक एहन कनियाँक रूप मे प्रस्‍तुत कऽ सकथि जे अति सुन्‍नरि होअय, जकरा मे ने कोनो दाग, ने झुर्री आ ने कोनो आन दोष होइक, बल्‍कि जे पवित्र और निष्‍कलंक होअय।
28. तहिना, पतिओ लोकनि केँ अपना स्‍त्री सँ अपन शरीर जकाँ प्रेम करबाक छैक। जे केओ अपना स्‍त्री सँ प्रेम करैत अछि, से अपना सँ प्रेम करैत अछि।
29. केओ कहाँ अपना शरीर सँ घृणा करैत अछि? बरु, ओ ओकर पालन-पोषण करैत अछि, ओकर देख-रेख करैत अछि। मसीहो मण्‍डलीक संग एहिना करैत छथि, कारण, मण्‍डली हुनकर शरीर छनि,
30. आ अपना सभ ओहि शरीरक अंग छी।
31. धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “एहि कारणेँ पुरुष अपन माय-बाबू केँ छोड़ि कऽ अपन स्‍त्रीक संग रहत, और दूनू एक शरीर भऽ जायत।”
32. ई एकटा पैघ रहस्‍य अछि, मुदा हम एकरा एहि रूप मे बुझैत छी जे ई मसीह और हुनकर मण्‍डलीक सम्‍बन्‍धक दिस संकेत करैत अछि।
33. तैयो एकर व्‍यक्‍तिगत रूप मे सेहो अर्थ होइत अछि—अहाँ सभ मे सँ हर व्‍यक्‍ति जहिना अपना सँ प्रेम करैत छी तहिना अपना स्‍त्री सँ प्रेम करू, और स्‍त्री अपन पतिक आदर करथि।