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एक साल में बाइबल
जनवरी 6

मत्ती 5:27-48
27. “अहाँ सभ सुनने छी जे कहल गेल, ‘परस्‍त्रीगमन नहि करह।’
28. मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जे कोनो पुरुष कोनो स्‍त्री केँ अधलाह इच्‍छा सँ देखैत अछि, से तखने अपना मोन मे ओकरा संग परस्‍त्रीगमन कऽ लेलक।
29. जँ अहाँक दहिना आँखि अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा निकालि कऽ फेकि दिअ। अहाँक शरीरक एके अंग नष्‍ट भऽ जाओ, से अहाँक लेल एहि सँ नीक होयत जे सम्‍पूर्ण शरीर नरक मे फेकि देल जाय।
30. जँ अहाँक दहिना हाथ अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा काटि कऽ फेकि दिअ। अहाँक शरीरक एके अंग नष्‍ट भऽ जाओ, से अहाँक लेल एहि सँ नीक होयत जे सम्‍पूर्ण शरीर नरक मे फेकि देल जाय।
31. “कहल गेल अछि जे, ‘जे पुरुष अपना स्‍त्री केँ तलाक दैत अछि, से तलाकनामा लिखि कऽ दैक।’
32. मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, स्‍त्री केँ दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखबाक कारण केँ छोड़ि कऽ जँ कोनो दोसर कारण सँ कोनो पुरुष अपना स्‍त्री केँ तलाक दैत अछि, तँ ओ अपना स्‍त्री केँ परपुरुषगमन करऽ वाली बनबाक लेल विवश करैत अछि, और जे केओ ओहि तलाक देल स्‍त्री सँ विवाह करैत अछि, सेहो परस्‍त्रीगमन करैत अछि।
33. “अहाँ सभ इहो सुनने छी जे प्राचीन समयक पुरखा सभ केँ कहल गेल छलनि जे, ‘सपत खा कऽ जे वचन देलह तकरा नहि तोड़िहह, बल्‍कि प्रभु सँ खायल अपन सपत केँ पूरा करिहह।’
34. मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे सपत खयबे नहि करू—ने स्‍वर्गक नाम लऽ कऽ, कारण ओ परमेश्‍वरक सिंहासन छनि,
35. ने पृथ्‍वीक नाम लऽ कऽ, कारण ओ परमेश्‍वरक पयर तरक चौकी छनि, ने यरूशलेमक, कारण ओ महान् राजाक नगर छनि,
36. और ने अपन माथक, कारण अहाँ अपन एकोटा केश केँ ने तँ उज्‍जर आ ने कारी कऽ सकैत छी।
37. अहाँ सभ जखन ‘हँ’ कहऽ चाहैत छी, तँ बस, ‘हँ’ए कहू, जखन ‘नहि’ कहऽ चाहैत छी, तँ ‘नहि’ए कहू। एहि सँ बेसी जे किछु बजैत छी से शैतान सँ प्रेरित बात अछि।
38. “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘केओ जँ ककरो आँखि फोड़य तँ ओकरो आँखि फोड़ल जाय, आ केओ जँ ककरो दाँत तोड़य तँ ओकरो दाँत तोड़ल जाय।’
39. मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जँ कोनो दुष्‍ट लोक अहाँ केँ किछु करओ, तँ ओकर विरोध नहि करू। केओ जँ अहाँक दहिना गाल पर थप्‍पड़ मारय तँ ओकरा सामने दोसरो गाल कऽ दिऔक।
40. केओ जँ अहाँ पर मोकदमा कऽ अहाँक कुर्ता लेबऽ चाहय तँ ओकरा ओढ़नो लेबऽ दिऔक।
41. जँ केओ अहाँ सँ कोनो वस्‍तु जबरदस्‍ती एक कोस उघबाबय तँ अहाँ दू कोस उघि दिऔक।
42. जे केओ अहाँ सँ किछु मँगैत अछि तकरा दिऔक, आ जे केओ अहाँ सँ पैंच लेबऽ चाहैत अछि तकरा सँ मुँह नहि घुमाउ।
43. “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘अपना पड़ोसी सँ प्रेम करह आ अपन शत्रु सँ दुश्‍मनी राखह।’
44. मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, अपना शत्रु सभ सँ प्रेम करू आ अहाँ केँ जे सभ सतबैत अछि तकरा सभक लेल प्रभु सँ प्रार्थना करू।
45. तखने अहाँ स्‍वर्ग मे रहऽ वला अपन पिताक सन्‍तान बनब। कारण, ओ दुष्‍ट आ सज्‍जन दूनू पर अपन सूर्यक प्रकाश दैत छथि, आ धर्मी और अधर्मी दूनू पर वर्षा करबैत छथि।
46. “जँ अहाँ मात्र ओकरे सभ सँ प्रेम करी जे अहाँ सँ प्रेम करैत अछि तँ अहाँ केँ परमेश्‍वर सँ की इनाम भेटत? की कर असूल कयनिहार ठकहारो सभ एहिना नहि करैत अछि?
47. आ जँ अहाँ मात्र अपने लोक सभक कुशल-मङलक पुछारी करैत छी तँ अहाँ कोन बड़का काज करैत छी? की परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हऽ वला जातिक लोक सभ सेहो एहिना नहि करैत अछि?
48. तेँ अहाँ सभ सिद्ध बनू जेना स्‍वर्ग मे रहऽ वला अहाँ सभक पिता परमेश्‍वर सिद्ध छथि।