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मत्ती 9:1-17
1. तखन यीशु नाव मे चढ़ि कऽ झील पार कयलनि आ फेर अपना नगर मे चल अयलाह।
2. किछु लोक सभ एकटा लकवा मारल आदमी केँ खाट पर लदने यीशु लग अनलकनि। यीशु ओकरा सभक विश्‍वास देखि लकवा मारल आदमी केँ कहलथिन, “हौ बेटा, साहस राखह, तोहर पाप माफ भेलह।”
3. ई सुनि किछु धर्मशिक्षक सभ अपना मोन मे सोचऽ लगलाह, “ई व्‍यक्‍ति तँ अपना केँ परमेश्‍वरक तुल्‍य बुझि हुनकर निन्‍दा करैत अछि!”
4. यीशु हुनकर सभक मोनक बात जानि कहलथिन, “अहाँ सभ अपना मोन मे अधलाह बात किएक सोचैत छी?
5. आसान की अछि—ई कहब जे, ‘तोहर पाप क्षमा भेलह’, वा ई कहब जे, ‘उठि कऽ चलह-फिरह’?
6. मुदा जाहि सँ अहाँ सभ ई बात बुझि जाइ जे मनुष्‍य-पुत्र केँ पृथ्‍वी पर पाप माफ करबाक अधिकार छनि, हम एकरा कहैत छी...” तखन ओ लकवाक रोगी केँ कहलथिन, “उठह, अपन खाट उठाबह आ घर चल जाह!”
7. ओ उठल आ घर चल गेल।
8. लोक सभ ई देखि भयभीत भेल आ एहि लेल परमेश्‍वरक प्रशंसा करऽ लागल जे ओ मनुष्‍य केँ एहन अधिकार देने छथिन।
9. ओहिठाम सँ आगाँ बढ़ला पर यीशु मत्ती नामक एक आदमी केँ कर असूल करऽ वला स्‍थान मे बैसल देखलथिन। यीशु हुनका कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ।” ओ उठि कऽ यीशुक संग चलऽ लगलथिन।
10. जखन यीशु मत्तीक घर मे भोजन करबाक लेल बैसलाह तँ बहुतो कर असूल कयनिहार आ “पापी” सभ आबि हुनका और हुनकर शिष्‍य सभक संग भोजन करबाक लेल बैसल।
11. ई देखि फरिसी सभ यीशुक शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभक गुरु कर असूल कयनिहार और पापी सभक संग किएक खाइत-पिबैत छथि?”
12. यीशु हुनकर सभक बात सुनि कहलथिन, “वैद्यक आवश्‍यकता स्‍वस्‍थ लोक केँ नहि होइत छैक, बल्‍कि बिमार सभ केँ!
13. अहाँ सभ जा कऽ प्रभुक कहल एहि वचनक अर्थ सिखू जे, ‘अहाँ सभक द्वारा अर्पित चढ़ौना वा बलि-प्रदान हम नहि चाहैत छी, बल्‍कि अहाँ सभ दयालु बनू, से।’ हम धार्मिक सभ केँ नहि, बल्‍कि पापी सभ केँ बजयबाक लेल आयल छी।”
14. बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन, “की कारण अछि जे हम सभ आ फरिसी सभ तँ उपास करैत रहैत छी, मुदा अहाँक शिष्‍य सभ उपास नहि करैत छथि?”
15. यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “जाबत तक वरियातीक संग वर अछि ताबत तक की वरियाती शोक मनाओत? नहि! मुदा ओ समय आओत जहिया वर ओकरा सभक बीच सँ हटा लेल जायत। ओ सभ तहिये उपास करत।
16. केओ पुरान कपड़ा पर नयाँ कपड़ाक चेफरी नहि लगबैत अछि, कारण, ओ चेफरी घोकचि कऽ पुरान कपड़ा केँ खिचत और ओ कपड़ा पहिनहु सँ बेसी फाटि जायत।
17. एहि तरहेँ लोक नव दारू पुरान चमड़ाक थैली मे नहि रखैत अछि। कारण, एना जँ करत तँ चमड़ाक थैली फाटि जयतैक; दारू बहि जयतैक, आ थैलिओ नष्‍ट भऽ जयतैक। नहि! नव दारू नये थैली मे राखल जाइत अछि। एहि तरहेँ दारू आ थैली दूनू सुरक्षित रहैत अछि।”