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एक साल में बाइबल
जनवरी 10

मत्ती 8:1-17
1. यीशु जखन पहाड़ पर सँ नीचाँ उतरलाह तँ लोकक बड़का भीड़ हुनका पाछाँ चलऽ लगलनि।
2. एक कुष्‍ठ-रोगी हुनका लग अयलनि आ निंघुड़ि कऽ प्रणाम करैत कहलकनि, “यौ प्रभु, अहाँ जँ चाही तँ हमरा शुद्ध कऽ सकैत छी।”
3. यीशु हाथ बढ़ा कऽ ओकरा छुबैत कहलथिन, “हम अवश्‍य चाहैत छिअह, तोँ शुद्ध भऽ जाह।” और ओ तुरत अपन रोग सँ शुद्ध भऽ गेल।
4. यीशु ओकरा कहलथिन, “सुनह, ककरो किछु कहिअहक नहि। जाह, अपना केँ पुरोहित केँ देखाबह, आ धर्म-नियम मे लिखल मूसाक आदेश अनुसार जे चढ़ौना चढ़यबाक अछि, से चढ़ाबह। एहि तरहेँ सभक लेल गवाही रहत जे तोँ शुद्ध भऽ गेल छह।”
5. यीशु जखन कफरनहूम नगर मे प्रवेश कयलनि तँ रोमी सेनाक एकटा कप्‍तान आबि हुनका सँ विनती कयलथिन,
6. “हे प्रभु, हमर नोकर लकवा सँ पीड़ित भऽ घर मे पड़ल अछि आ महा कष्‍ट मे अछि।”
7. यीशु हुनका कहलथिन, “हम आबि ओकरा स्‍वस्‍थ कऽ देबैक।”
8. सेनाक कप्‍तान उत्तर देलथिन, “यौ प्रभु, हम एहि जोगरक नहि छी जे अपने हमरा घर पर आबी। अपने मात्र कहि देल जाओ आ हमर नोकर स्‍वस्‍थ भऽ जायत।
9. कारण हमहूँ शासनक अधीन मे छी, और हमरा अधीन मे सैनिक सभ अछि। हम एकटा केँ कहैत छिऐक, ‘जाह’ तँ ओ जाइत अछि आ दोसर केँ कहैत छिऐक, ‘आबह’ तँ ओ अबैत अछि। हम अपना नोकर केँ कहैत छिऐक, ‘ई काज करह’ तँ ओ करैत अछि।”
10. हुनकर बात सुनि यीशु केँ आश्‍चर्य भेलनि आ ओ अपना पाछाँ चलऽ वला लोक सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, हम इस्राएली सभ मे एहन विश्‍वास ककरो मे नहि देखलहुँ।
11. हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, पूब आ पश्‍चिम सँ बहुत लोक आओत और अब्राहम, इसहाक आ याकूबक संग स्‍वर्गक राज्‍य मे भोज खयबाक लेल बैसत,
12. मुदा जे सभ ⌞अब्राहमक वंशज होयबाक कारणेँ⌟ राज्‍यक उत्तराधिकारी होयबाक चाही, से सभ बाहर अन्‍हार मे भगाओल जायत, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत।”
13. तकरबाद यीशु सेनाक कप्‍तान केँ कहलथिन, “जाउ, जेहन विश्‍वास अहाँ कयलहुँ अछि, अहाँक लेल ओहिना होयत।” ओही घड़ी हुनकर नोकर स्‍वस्‍थ भऽ गेलनि।
14. यीशु जखन पत्रुसक घर मे अयलाह तँ देखैत छथि जे पत्रुसक सासु बोखार सँ पीड़ित भऽ ओछायन पर पड़ल छथि।
15. यीशु हुनकर हाथ केँ छुबि देलथिन आ हुनकर बोखार उतरि गेलनि। ओ उठि कऽ हिनकर सेवा-सत्‍कार करऽ लगलीह।
16. साँझ पड़ला पर लोक सभ बहुतो लोक केँ जकरा मे दुष्‍टात्‍मा छलैक यीशु लग अनलकनि। यीशु आज्ञा दऽ कऽ ओकरा सभ मे सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालि देलथिन और सभ रोगी केँ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन,
17. जाहि सँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाहक ई वचन पूरा होअय जे, “ओ हमर सभक रोग-बिमारी अपना पर लऽ हमरा सभ सँ दूर हटा देलनि।”