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एक साल में बाइबल
अप्रैल 15

लूका 12:32-59
32. “हे हमर भेँड़ाक छोट समूह, नहि डेराउ, किएक तँ अहाँ सभक पिता खुशी सँ अपन राज्‍य अहाँ सभ केँ देबाक निर्णय कऽ लेने छथि।
33. अपन सम्‍पत्ति बेचि कऽ गरीब सभ केँ दिअ। अपना लेल एहन बटुआ बना लिअ जे कहियो नहि पुरान होइत अछि, स्‍वर्ग मे धन जमा करू जे कहियो घटैत नहि अछि, जकरा ने चोर छुबि सकैत अछि आ ने कीड़ा नोकसान कऽ सकैत अछि।
34. कारण, जतऽ अहाँक धन अछि ततहि अहाँक मोनो लागल रहत।
35. “अहाँ सभ अपन डाँड़ कसने रहू, और डिबिया लेसने रहू।
36. ओहि नोकर सभ जकाँ रहू जे अपना मालिकक बाट ताकि रहल अछि जे, ओ विवाहक भोज खा कऽ कखन औताह जाहि सँ जखने आबि केबाड़ खटखटौताह तँ तुरत्ते खोलि दियनि।
37. कतेक नीक ओहि नोकर सभक लेल होयतैक, जकरा सभ केँ मालिक अयला पर प्रतीक्षा करैत पौताह। हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, मालिक अपन फाँड़ बान्‍हि कऽ ओकरा सभ केँ भोजन करबाक लेल बैसौथिन, और अपने सँ ओकरा सभ केँ परसि कऽ खुऔथिन।
38. हँ, ओहि नोकर सभक लेल कतेक नीक होयत, जकरा सभ केँ मालिक रातिक दोसरो वा तेसरो पहर मे आबि कऽ तैयार पौथिन।
39. मुदा ई बात जानि लिअ जे, घरक मालिक जँ बुझने रहैत जे चोर कय बजे आबि रहल अछि, तँ ओ अपना घर मे सेन्‍ह नहि काटऽ दैत।
40. अहूँ सभ सदिखन तैयार रहू, कारण मनुष्‍य-पुत्र एहने समय मे आबि जयताह जाहि समयक लेल अहाँ सभ सोचबो नहि करब जे ओ एखन औताह।”
41. पत्रुस पुछलथिन, “प्रभु, की ई दृष्‍टान्‍त अहाँ हमरे सभक लेल कहि रहल छी, वा सभक लेल?”
42. प्रभु उत्तर देलथिन, “तँ के अछि ओहन विश्‍वासपात्र आ बुद्धिमान भण्‍डारी जकरा मालिक अपना नोकर-चाकर सभक मुखिया बना दैत छथि जे ओ निश्‍चित समय पर ओकरा सभ केँ निर्धारित भोजन दैक?
43. ओहि सेवकक लेल कतेक नीक होयत, जकरा मालिक आबि कऽ ओहिना करैत पौताह।
44. हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, मालिक अपन सम्‍पूर्ण सम्‍पत्तिक जबाबदेही ओकरा जिम्‍मा मे दऽ देथिन।
45. मुदा जँ ओ सेवक अपना मोन मे सोचऽ लागय जे, ‘हमर मालिक आबऽ मे बहुत देरी कऽ रहल अछि,’ और ओ नोकर-नोकरनी सभ केँ मारऽ-पिटऽ लागय आ खाय-पिबऽ मे लागि कऽ मातल रहऽ लागय,
46. तँ ओकर मालिक एहन दिन मे घूमि औताह जहिया ओ हुनकर बाट नहि तकैत रहत आ एहन समय मे औताह जकरा ओ नहि जानत। मालिक ओकरा खण्‍डी-खण्‍डी कऽ देथिन और ओकर अन्‍त ओहन होयतैक जे अविश्‍वासी सभक होइत छैक।
47. “ओ सेवक जे अपन मालिकक इच्‍छा तँ जनैत अछि मुदा तकरा पूरा करबाक लेल किछु नहि करैत अछि, से बहुत मारि खायत।
48. मुदा जे नहि जनैत अछि आ तखन मारि खाय जोगरक काज करैत अछि, से कम मारि खायत। जकरा बहुत देल गेल छैक, तकरा सँ बहुत माँगलो जयतैक, आ जतेक आओर बेसी ककरो देल गेल छैक, ततेक आओर फेर ओकरा घुमाबऽ पड़तैक।
49. “हम पृथ्‍वी पर आगि लगाबऽ आयल छी, और हमरा बड्ड इच्‍छा अछि जे ओ एखने सुनगि गेल रहैत।
50. मुदा हमरा एकटा बड़का कष्‍ट भोगबाक अछि, और जाबत तक ओ बात पूर्ण नहि होयत, ताबत तक हम कतेक व्‍याकुल छी!
51. की अहाँ सभ सोचैत छी जे हम पृथ्‍वी पर मेल-मिलाप करयबाक लेल आयल छी? नहि! हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, मेल-मिलाप नहि, बल्‍कि फूट!
52. आब सँ एके परिवार मे पाँच व्‍यक्‍ति एक-दोसराक विरोधी भऽ जायत, तीन गोटेक विरोध मे दू, आ दू गोटेक विरोध मे तीन।
53. अपना मे फूट भऽ जायत—बाबू बेटाक विरोध मे, आ बेटा बाबूक विरोध मे, माय बेटीक विरोधी, आ बेटी मायक, सासु पुतोहुक विरोधी, आ पुतोहु सासुक।”
54. यीशु भीड़क लोक सभ केँ इहो कहलथिन, “पश्‍चिम मे मेघ उठैत देखिते अहाँ सभ कहैत छी जे, वर्षा होयत, और से होइतो अछि।
55. और जखन दछिनाही बहैत देखैत छी तँ कहैत छी जे, बड्ड गर्मी पड़त, और से पड़बो करैत अछि।
56. यौ पाखण्‍डी सभ! पृथ्‍वी और आकाशक लक्षण अहाँ सभ चिन्‍हि लैत छी, तँ एहि वर्तमान समयक लक्षण सभ किएक नहि चिन्‍हैत छी?
57. “अहाँ सभ अपने किएक नहि निर्णय करैत छी जे उचित की अछि?
58. केओ अहाँ पर मोकदमा कऽ कऽ कचहरी लऽ जा रहल अछि, तँ बाटे मे ओकरा संग समझौता करबाक प्रयत्‍न करू। एना नहि होअय जे ओ अहाँ केँ न्‍यायाधीशक समक्ष बलजोरी लऽ जाय, न्‍यायाधीश अहाँ केँ सिपाहीक हाथ मे दऽ देअय, आ सिपाही अहाँ केँ जहल मे बन्‍द कऽ देअय।
59. हम अहाँ केँ कहैत छी जे, जाबत धरि अहाँ पाइ-पाइ कऽ सधा नहि देबैक, ताबत धरि ओतऽ सँ नहि छुटब।”