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एक साल में बाइबल
अप्रैल 12

लूका 11:1-28
1. एक दिन यीशु कोनो स्‍थान पर प्रार्थना कऽ रहल छलाह। जखन ओ प्रार्थना समाप्‍त कयलनि तखन हुनकर एक शिष्‍य कहलथिन, “प्रभु, जहिना यूहन्‍ना अपना शिष्‍य सभ केँ प्रार्थना कयनाइ सिखौलनि, तहिना अहूँ हमरा सभ केँ सिखाउ।”
2. यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “जखन अहाँ सभ प्रार्थना करब तँ एना कहू— हे पिता, अहाँक नाम पवित्र मानल जाय। अहाँक राज्‍य आबय।
3. हमरा सभ केँ प्रत्‍येक दिन भोजन दिअ, जे दिन प्रति दिन हमरा सभक लेल आवश्‍यक अछि।
4. हमरा सभक पाप क्षमा करू, किएक तँ हमहूँ सभ तकरा सभ केँ क्षमा करैत छी जे सभ हमरा सभक संग अपराध करैत अछि। और हमरा सभ केँ पाप मे फँसाबऽ वला बात सँ दूर राखू।”
5. तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “मानि लिअ जे अहाँ सभ मे सँ ककरो कोनो संगी होइक और ओ ओहि संगीक ओहिठाम दुपहरिया राति मे जा कऽ कहैक जे, ‘यौ मित्र, हमरा तीनटा रोटी दिअ।
6. कारण, हमर एक मित्र जे यात्रा पर छथि से हमरा ओतऽ एखने अयलाह अछि और हुनका भोजन करयबाक लेल हमरा लग किछु नहि अछि।’
7. तँ की भीतर सँ ओकर संगी उत्तर देतैक जे, ‘हमरा तंग नहि करू। केबाड़ लागल अछि और धिआ-पुता सभ हमरा लग सुतल अछि। हम अहाँ केँ किछु देबाक लेल नहि उठि सकैत छी।’?
8. हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, ओ जँ ओकर संगी रहबाक कारणेँ उठि कऽ रोटी नहि देतैक तैयो ओकरा निःसंकोच भऽ कऽ मँगबाक कारणेँ ओ उठि कऽ ओकरा जतेक आवश्‍यकता छैक ततेक देतैक।
9. हँ, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, माँगू तँ अहाँ केँ देल जायत। ताकू तँ अहाँ केँ भेटत। ढकढकाउ तँ अहाँक लेल खोलल जायत।
10. कारण, जे केओ मँगैत अछि, से प्राप्‍त करैत अछि। जे केओ तकैत अछि, तकरा भेटैत छैक। और जे केओ ढकढकबैत अछि, तकरा लेल खोलल जाइत छैक।
11. “अहाँ सभ मे सँ के एहन बाबू छी जे, बेटा जँ माछ माँगय तँ तकरा बदला मे साँप दिऐक?
12. वा जँ अण्‍डा माँगय तँ बीछ दिऐक?
13. जखन अहाँ सभ पापी होइतो अपना बच्‍चा सभ केँ नीक वस्‍तु सभ देनाइ जनैत छी, तँ अहाँ सभ सँ बढ़ि कऽ अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि, से मँगनिहार सभ केँ अपन पवित्र आत्‍मा किएक नहि देथिन?”
14. एक बेर यीशु एक बौक दुष्‍टात्‍मा केँ एक आदमी मे सँ निकालि रहल छलाह। दुष्‍टात्‍मा जखन निकलि गेल तँ बौक आदमी बाजऽ लागल। ई देखि लोक सभ चकित भऽ गेल।
15. मुदा कतेक गोटे कहऽ लागल, “ई तँ दुष्‍टात्‍मा सभक मुखिया बालजबूलक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालैत अछि।”
16. दोसर लोक हुनका जाँच करबाक लेल स्‍वर्ग सँ कोनो चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह देखयबाक लेल कहलकनि।
17. मुदा यीशु ओकरा सभक विचार बुझि कऽ ओकरा सभ केँ कहलथिन, “जाहि राज्‍य मे फूट पड़ि जाय, से उजड़ि जाइत अछि, और जाहि परिवार मे फूट भऽ जाय से नष्‍ट भऽ जाइत अछि।
18. शैतान जँ स्‍वयं अपन विरोधी भऽ जाय तँ ओकर राज्‍य कोना टिकल रहतैक? हम ई बात एहि लेल कहैत छी जे अहाँ सभक कथन अछि जे हम दुष्‍टात्‍मा सभ केँ बालजबूलक शक्‍ति सँ निकालैत छी।
19. जँ हम बालजबूलक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा निकालैत छी तँ अहाँ सभक चेला सभ ककरा शक्‍ति सँ निकालैत अछि? वैह सभ अहाँ सभक फैसला करत।
20. मुदा जँ हम परमेश्‍वरक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा निकालैत छी तँ ई जानि लिअ जे परमेश्‍वरक राज्‍य अहाँ सभ लग पहुँचि गेल अछि।
21. “जखन कोनो बलगर आदमी हाथ-हथियार सँ लैस भऽ कऽ अपन घरक रखबारी करैत अछि तँ ओकर धन-सम्‍पत्ति सुरक्षित रहैत छैक।
22. मुदा जखन ओकरो सँ बलगर कोनो दोसर आदमी ओकरा पर आक्रमण कऽ कऽ ओकरा पराजित करैत छैक, तँ ओ ओकर सभ हथियार जाहि पर ओकरा पूरा भरोसा रहैत छैक, से छिनि लैत अछि आ ओकर सम्‍पत्ति लुटि कऽ अपना संगी सभ मे बाँटि दैत अछि।
23. “जे हमरा संग नहि अछि से हमरा विरोध मे अछि; जे हमरा संग जमा नहि करैत अछि से छिड़िअबैत अछि।
24. “जखन दुष्‍टात्‍मा कोनो आदमी मे सँ बहरा जाइत अछि तँ ओ दुष्‍टात्‍मा मरुभूमि मे आराम करबाक स्‍थानक खोज मे घुमैत रहैत अछि, मुदा ओकरा भेटैत नहि छैक। तखन ओ कहैत अछि, ‘हम अपन पहिलुके घर मे, जतऽ सँ बहरा कऽ आयल छलहुँ ततहि फेर जायब।’
25. ओ जखन ओहिठाम पहुँचैत अछि और देखैत अछि जे ओ घर झाड़ल-बहारल साफ-सुथरा अछि,
26. तँ ओ जा कऽ अपनो सँ दुष्‍टाह सातटा आरो दुष्‍टात्‍मा केँ लऽ अनैत अछि आ ओ सभ ओहि घर मे अपन डेरा खसा लैत अछि। एहि तरहेँ ओहि आदमीक ई दशा पहिलुको दशा सँ खराब भऽ जाइत छैक।”
27. यीशु ई बात सभ कहिए रहल छलाह कि भीड़ मे एक स्‍त्री जोर सँ बाजि उठलि, “धन्‍य छथि ओ स्‍त्री जे अहाँ केँ जन्‍म देलनि और दूध पियौलनि!”
28. यीशु उत्तर देलथिन, “हँ, मुदा ताहू सँ धन्‍य छथि ओ सभ जे परमेश्‍वरक वचन सुनैत छथि और तकर पालन करैत छथि।”