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यूहन्‍ना 8:1-27
1. मुदा यीशु जैतून पहाड़ पर गेलाह।
2. भोरे भोर यीशु फेर मन्‍दिर मे अयलाह। लोक सभ हुनका लग आयल और ओ बैसि कऽ ओकरा सभ केँ शिक्षा देबऽ लगलाह।
3. धर्मशिक्षक और फरिसी सभ एक स्‍त्रीगण केँ अनलनि, जे पुरुषक संग कुकर्म करैत पकड़ा गेल छल, और लोकक बीच मे ओकरा ठाढ़ कऽ कऽ
4. यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी, ई स्‍त्रीगण पुरुषक संग कुकर्म करिते मे पकड़ा गेल।
5. धर्म-नियम मे मूसा हमरा सभ केँ आज्ञा देलनि जे एहन स्‍त्रीगण केँ पाथर मारि कऽ मारि देबाक चाही। आब अहाँ की कहैत छी?”
6. ई बात ओ सभ हुनका फँसाबऽ लेल पुछलनि, जाहि सँ हुनका पर दोष लगयबाक आधार भेटनि। यीशु नीचाँ झुकि कऽ अपन आङुर सँ जमीन पर लिखऽ लगलाह।
7. ओ सभ जखन हुनका सँ पुछिते रहलाह, तखन ओ मूड़ी उठा कऽ हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ मे सँ जे निष्‍पाप होथि, वैह सभ सँ पहिने पाथर मारथि।”
8. और फेर झुकि कऽ जमीन पर लिखऽ लगलाह।
9. ई बात जखन ओ सभ सुनलनि तँ पहिने बूढ़ सभ आ तखन एक-एक कऽ सभ केओ चल गेलाह। आब मात्र यीशु रहि गेलाह, और ओ स्‍त्रीगण जे ओहिठाम ठाढ़ छलि।
10. यीशु मूड़ी उठा कऽ ओकरा कहलथिन, “बहिन, ओ सभ कतऽ अछि? की तोरा केओ नहि दण्‍ड देलकह?”
11. ओ बाजल, “नहि, मालिक, केओ नहि।” यीशु बजलाह, “हमहूँ तोरा दण्‍ड नहि दैत छिअह। आब जाह, आ फेर पाप नहि करह।”]
12. बाद मे यीशु फेर लोक सभ केँ कहलनि, “हम संसारक इजोत छी। जे केओ हमरा पाछाँ आओत, से अन्‍हार मे कहियो नहि चलत, बल्‍कि जीवनक इजोत प्राप्‍त करत।”
13. एहि पर फरिसी सभ हुनका कहलथिन, “आब अहाँ अपना बारे मे अपने गवाही दऽ रहल छी! अहाँक गवाही पकिया नहि मानल जायत।”
14. यीशु उत्तर देलथिन, “जँ हम अपना बारे मे गवाही दैतो छी तँ हमर गवाही पकिया होइत अछि, कारण हम जनैत छी जे हम कतऽ सँ आयल छी और कतऽ जा रहल छी, मुदा अहाँ सभ नहि जनैत छी जे हम कतऽ सँ अयलहुँ वा कतऽ जाय वला छी।
15. अहाँ सभ सांसारिक दृष्‍टि सँ न्‍याय करैत छी। हम ककरो न्‍याय नहि करैत छी।
16. तैयो जँ हम न्‍याय करितो छी तँ हमर न्‍याय उचित होइत अछि कारण निर्णय हम असगरे नहि, बल्‍कि हमर पिता, जे हमरा पठौलनि, से और हम दूनू गोटे करैत छी।
17. अहीं सभक धर्म-नियम मे लिखल अछि जे दू आदमीक गवाही पकिया होइत अछि।
18. हम अपना बारे मे अपने एक गवाह छी और हमर दोसर गवाह ओ छथि जे हमरा पठौलनि—हमर पिता।”
19. ओ सभ तखन हुनका कहलथिन, “अहाँक पिता कतऽ छथि?” यीशु बजलाह, “अहाँ सभ ने हमरा चिन्‍हैत छी, आ ने हमरा पिता केँ। जँ हमरा चिन्‍हितहुँ तँ हमरा पितो केँ चिन्‍हितिऐन।”
20. ई सभ बात ओ शिक्षा दैत काल मन्‍दिरक ओहि भाग मे कहलनि जाहिठाम दान-पात्र राखल रहैत छल। तैयो हुनका केओ नहि पकड़लकनि, किएक तँ हुनकर समय एखन तक नहि आयल छल।
21. यीशु हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “हम तँ जा रहल छी। अहाँ सभ हमरा ताकब, और अपना पाप मे मरब। हम जतऽ जाइत छी ततऽ अहाँ सभ नहि आबि सकैत छी।”
22. एहि पर यहूदी सभ एक-दोसर केँ कहऽ लागल, “तँ की ओ आत्‍महत्‍या कऽ लेत? की एहि कारणेँ ओ कहैत अछि जे, हम जतऽ जाइत छी ततऽ अहाँ सभ नहि आबि सकैत छी?”
23. ओ ओकरा सभ केँ आगाँ कहलथिन, “अहाँ सभ नीचाँक छी, हम ऊपरक छी। अहाँ सभ एही दुनियाक छी, हम एहि दुनियाक नहि छी।
24. एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहलहुँ जे, अहाँ सभ अपना पाप मे मरब। कारण, जँ अहाँ सभ विश्‍वास नहि करब जे हम वैह छी जे छी, तँ अहाँ सभ अपना पाप मे अवश्‍य मरब।”
25. ओ सभ हुनका कहलकनि, “तखन अहाँ के छी?” यीशु बजलाह, “वैह, जे हम शुरुए सँ अहाँ सभ केँ कहैत आबि रहल छी।
26. अहाँ सभक सम्‍बन्‍ध मे हमरा बहुत किछु कहबाक और न्‍याय करबाक अछि। मुदा जे हमरा पठौलनि, से सत्‍य छथि, और जे बात हम हुनका सँ सुनने छी, वैह बात हम संसार केँ कहैत छी।”
27. ओ सभ नहि बुझलक जे यीशु पिताक बारे मे ओकरा सभ केँ कहैत छथि।