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हिंदी बाइबिल ERV 2010
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न्यायियों २०

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इस प्रकार इस्राएल के सभी लोग एक हो गए। वे मिस्पा नगर में यहोवा के सामने खड़े होने के लिए एक साथ आए। वे पूरे इस्राएल देश से आए। गिलाद प्रदेश के सभी इस्राएली लोग भी वहाँ थे।

इस्राएल के परिवार समूहों के सभी प्रमुख वहाँ थे। वे परमेश्वर के सारे लोगों की सभा में अपने-अपने स्थानों पर बैठे। उस स्थान पर तलवार के साथ चार लाख सैनिक थे।

बिन्यामीन के परिवार समूह के लोगों ने सुना कि इस्राएल के लोगों मिस्पा नगर में पहुँचे हैं। इस्राएल के लोगों ने कहा, “यह बताओ कि यह पाप कैसे हुआ।”

अत: जिस स्त्री की हत्या हुई थी उसके पति ने कहा, “मेरी रखैल और मैं बिन्यामीन के प्रदेश में गिबा नगर में पहुँचे। हम लोगों ने वहाँ रात बिताई।

किन्तु रात को गिबा नगर के प्रमुख उस घर पर आए जिसमें मैं ठहरा था। उन्होंने घर को घेर लिया और वे मुझे मार डालना चाहते थे। उन्होंने मेरी रखैल के साथ कुकर्म किया और वह मर गई।

इसलिए मैं अपनी रखैल को ले गया और उसके टुकड़े कर डाले। तब मैंने हर एक टुकड़ा इस्राएल के हर एक परिवार समूह को भेजा। मैंने बारह टुकड़े उन प्रदेशों को भेजे जिन्हें हमने पाया। मैंने यह इसलिए किया कि बिन्यामीन के परिवार समूह के लोगों ने इस्राएल के देश में यह क्रूर और भयंकर काम किया है।

अब, इस्राएल के सभी लोगों, आप बोलें। आप अपना निर्णय दें कि हमें क्या करना चाहिये?”

तब सभी लोग उसी समय उठ खड़े हुए। उन्होने आपस में कहा, “हम लोगों में से कोई घर नहीं लौटेगा। कोई नहीं, हम लोगों में से एक भी घर नहीं लौटेगा।

हम लोग गिबा नगर के साथ यह करेंगे। हम गोट डालेंगे। जिससे परमेश्वर बताएगा कि हम लोग उन लोगों के साथ क्या करें।

१०

हम लोग इस्राएल के सभी परिवारों के हर एक सौ में से दस व्यक्ति चुनेंगे और हम लोग हर एक हजार में से सौ व्यक्ति चुनेंगे। हम लोग हर एक दस हजार में से हजार चुनेंगे। जिन लोगों को हम चुन लेंगे वे सेना के लिए आवश्यक सामग्री पाएंगे। तब सेना बिन्यामीन के प्रदेश में गिबा नगर को जाएगी। वह सेना उन लोगों से बदला चुकाएगी जिन्होंने इस्राएल के लोगों में यह भयंकर काम किया है।”

११

इसलिए इस्राएल के सभी लोग गिबा नगर में एकत्रित हुए। वे उसके एक मत थे, जो वे कर रहे थे।

१२

इस्राएल के परिवार समूह ने एक सन्देश के साथ लोगों को बिन्यामीन के परिवार समूह के पास भेजा। सन्देश यह था: “इस पाप के बारे में क्या कहना है जो तुम्हारे कुछ लोगों ने किया है?

१३

उन गिबा के पापी मनुष्यों को हमारे पास भेजो। उन लोगों को हमें दो जिससे हम उन्हें जान से मार सकें। हम इस्राएल के लोगों में पाप को अवश्य दूर करेंगे।” किन्तु बिन्यामीन के परिवार समूह के लोगों ने अपने सम्बन्धी इस्राएल के लोगो के दूतों की एक न सुनी।

१४

बिन्यामीन के परिवार समूह के लोगों ने अपने नगरों को छोड़ा और वे गिबा नगर में पहुँचे। वे गिबा में इस्राएल के अन्य परिवार समूह के विरुद्ध लड़ने गए।

१५

बिन्यामीन परिवार समूह के लोगों ने छब्बीस हजार सैनिकों को इकट्ठा किया। वे सभी सैनिक युद्ध के लिये प्रशिक्षित थे। उनके साथ गिबा नगर के सात सौ प्रशिक्षित सैनिक भी थे।

१६

उनके सात सौ ऐसे प्रशिक्षित व्यक्ति भी थे जो बाँया हाथ चलाने में दक्ष थे। उनमें से हर एक गुलेल का उपयोग दक्षता से कर सकता था। वे सब एक बाल पर भी पत्थर मार सकते थे और निशाना नहीं चूकता था।

१७

इस्राएल के सारे परिवारों ने, बिन्यामीन को छोड़कर चार लाख योद्धाओं को इकट्ठा किया। उन चार लाख योद्धाओं के पास तलवारें थीं। उनमें हर एक प्रशिक्षित सैनिक था।

१८

इस्राएल के लोग बेतेल नगर तक गए। बेतेल में उन्होंने परमेश्वर से पूछा, “कौन सा परिवार समूह बिन्यामीन के परिवार समूह पर प्रथम आक्रमण करेगा?” यहोवा ने उत्तर दिया, “यहूदा का परिवार समूह प्रथम जाएगा।”

१९

अगली सुबह इस्राएल के लोग उठे। उन्होंने गिबा के निकट डेरा डाला।

२०

तब इस्राएल की सेना बिन्यामीन की सेना से युद्ध के लिये निकल पड़ी। इस्राएल की सेना ने गिबा नगर में बिन्यामीन की सेना के विरुद्ध अपना मोर्चा लगाया।

२१

तब बिन्यामीन की सेना गिबा नगर के बाहर निकली। उन्होंने उस दिन की लड़ाई में इस्राएल की सेना के बाईस हजार लोगों को मार डाला।

२२

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२३

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२४

तब इस्राएल की सेना बिन्यामीन की सेना के पास आई। यह युद्ध का दूसरा दिन था।

२५

बिन्यामीन की सेना दूसरे दिन इस्राएल की सेना पर आक्रमण करने के लिये गिबा नगर से बाहर आई। इस समय बिन्यामीन की सेना ने इस्राएल की सेना के अन्य अट्ठारह हजार सैनिकों को मार डाला। इस्राएल की सेना के वे सभी प्रशिक्षित सैनिक थे।

२६

तब इस्राएल के सभी लोग बेतेल नगर तक गए। उस स्थान पर वे बैठे और यहोवा को रोकर पुकारा। उन्होंने पूरे दिन शाम तक कुछ नहीं खाया। वे होमबलि और मेलबलि भी यहोवा के लिये लाए।

२७

इस्राएल के लोगों ने यहोवा से एक प्रश्न पूछा। (इन दिनों परमेश्वर का साक्षीपत्र का सन्दूक बेतेल में था।

२८

पीनहास नामक एक याजक साक्षीपत्र के सन्दूक के सामने सेवा करता था। पीनहास एलीआज़ार नामक व्यक्ति का पुत्र था। एलीआज़ार हारून का पुत्र था।) इस्राएल के लोगों ने पूछा, “क्या हमें बिन्यामीन के लोगों के विरूद्ध फिर लड़ने जाना चाहिए। वे लोग हमारे सम्बन्धी हैं या हम युद्ध करना बन्द कर दें?” यहोवा ने उत्तर दिया, “जाओ। कल मैं उन्हें हराने में तुम्हारी सहायता करूँगा।”

२९

तब इस्राएल की सेना ने गिबा नगर के चारों ओर अपने व्यक्तियों को छिपा दिया।

३०

इस्राएल की सेना तीसरे दिन गिबा नगर के विरुद्ध लड़ने गई। उन्होंने जैसा पहले किया था वैसा ही लड़ने के लिये मोर्चा लगाया।

३१

बिन्यामीन की सेना इस्राएल की सेना से युद्ध करने के लिये गिबा नगर के बाहर निकल आई। इस्राएल की सेना पीछे हटी और उसने बिन्यामीन की सेना को पीछा करने दिया। इस प्रकार बिन्यामीन की सेना को नगर को बहुत पीछे छोड़ देने के लिये धोखा दिया गया। बिन्यमीन की सेना ने इस्राएल की सेना के कुछ लोगों को वेसे ही मारना आरम्भ किया जैसे उन्होंने पहले मारा था। इस्राएल के लगभग तीस व्यक्ति मारे गए। उनमें से कुछ लोग मैदानों में मारे गए थे। उनमें से कुछ व्यक्ति सड़कों पर मारे गए थे। एक सड़क बेतेल को जा रही थी। दूसरी सड़क गिबा को जा रही थी।

३२

बिन्यामीन के लोगों ने कहा, “हम पहले की तरह जीत रहे हैं।” उसी समय इस्राएल के लोग पीछे भाग रहे थे लेकिन यह एक चाल थी। वे बिन्यामीन के लोगों को उनके नगर से दूर सड़कों पर लाना चाहते थे।

३३

इस्राएल की सेना के सभी लोग अपने स्थानों से हटे। वे बालतामार स्थान पर रूके। तब जो लोग गिबा के पश्चिम को दौड़ पड़े।

३४

इस्राएल की सेना के पूरे प्रशिक्षित दस हजार सैनिकों ने गिबा नगर पर आक्रमण किया। युद्ध बड़ा भीषण था। किन्तु बिन्यामीन की सेना नहीं जानती थी कि उनके साथ कौन सी भंयकर घटना होने जा रही है?

३५

यहोवा ने इस्राएल की सेना का उपयोग किया और बिन्यामीन की सेना को पराजित किया। उस दिन इस्राएल की सेना ने बिन्यामीन की पच्चीस हजार एक सौ सैनिकों को मार डाला। वे सभी सैनिक युद्ध के लिये प्रशिक्षित थे।

३६

इस प्रकार बिन्यामीन के लोगों ने देखा कि वे पराजित हो गए। इस्राएल की सेना पीछे हटी। वे पीछे हटे क्योंकि वे उस अचानक आक्रमण पर भरोसा कर रहे थे जिसके लिये वे गिबा के निकट व्यवस्था कर चुके थे।

३७

जो व्यक्ति गिबा के चारों ओर छिपे थे वे गिबा नगर में टूट पड़े। वे फैल गए और उन्होंने अपनी तलवारों से नगर के हर एक को मार डाला।

३८

इस्राएली सेना के दल और छिपकर घात लगाने वाले दल के बीच यह संकेत चिन्ह निश्चित किया गया था कि छिपकर घात लगाने वाला दल नगर से धुएँ का विशाल बादल उड़ाएगा।

३९

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४०

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४१

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४२

इसलिये बिन्यामीन की सेना इस्राएल की सेना के सामने से भाग खड़ी हुई। वे रेगिस्तान की ओर भागे। लेकिन वे युद्ध से बच न सके। इस्राएल के लोग नगर से बाहर आए और उन्हें मा डाला।

४३

इस्राएल के लोगों ने बिन्यामीन के लोगों को हराया। उन्होंने बिन्यामीन के लोगों का पीछा किया। उन्हें आराम नहीं करने दिया। उन्होने उन्हें गिबा के पूर्व के क्षेत्र मैं हराया।

४४

इस प्रकार अट्ठारह हजार वीर और शक्तिशाली बिन्यामीन की सेना के सैनिक मारे गए।

४५

बिन्यामीन की सेना मुड़ी और मरुभूमि की ओर भागी। वे रिम्मोन की चट्टान नामक स्थान पर भाग कर गए। किन्तु इस्राएल की सेना ने सड़क के सहारे बिन्यामीन की सेना के पाँच हजार सैनिकों को मार डाला। वे बिन्यामीन के लोगों का पीछा करते रहे। उन्होंने उनका पीछा गिदोम नामक स्थान तक किया। इस्राएल की सेना ने उस स्थान पर बिन्यामीन की सेना के दो हजार और सैनिकों को मार डाला।

४६

उस दिन बिन्यामीन की सेना के पच्चीस हजार सैनिक मारे गए। उन सभी व्यक्तियों के पास तलवारें थीं। बिन्यामीन के वे लोग वीर योद्धा थे।

४७

किन्तु बिन्यामीन के छ: सौ व्यक्ति मुड़े और मरुभूमि में भाग गए। वे रिम्मोन की चट्टान नामक स्थान पर गए। वे वहाँ चार महीने तक ठहरे रहे।

४८

इस्राएल के लोग बिन्यामीन के प्रदेश में लौटकर गए। जिन नगरों में वे पहुँचे, उन नगरों के आदमियों को उन्होंने मार डाला। उन्होंने सभी जानवरों को भी मार डाला। वे जो कुछ पा सकते थे, उसे नष्ट कर दिया। वे जिस नगर में गए, उसे जला डाला।

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