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بائبل ایک سال میں


مئی ۳۰


یوحنا ۱۱:۱-۲۹
۱. उन दिनों में एक आदमी बीमार पड़ गया जिस का नाम लाज़र था। वह अपनी बहनों मरियम और मर्था के साथ बैत-अनियाह में रहता था।
۲. यह वही मरियम थी जिस ने बाद में ख़ुदावन्द पर ख़ुश्बू डाल कर उस के पैर अपने बालों से ख़ुश्क किए थे। उसी का भाई लाज़र बीमार था।
۳. चुनाँचे बहनों ने ईसा' को खबर दी, “ख़ुदावन्द, जिसे आप मुहब्बत करते हैं वह बीमार है।”
۴. जब ईसा' को यह ख़बर मिली तो उस ने कहा, “इस बीमारी का अन्जाम मौत नहीं है, बल्कि यह खुदा के जलाल के वास्ते हुआ है, ताकि इस से खुदा के फ़र्ज़न्द को जलाल मिले।”
۵. ईसा' मर्था, मरियम और लाज़र से मुहब्बत रखता था।
۶. तो भी वह लाज़र के बारे में खबर मिलने के बाद दो दिन और वहीं ठहरा।
۷. फिर उस ने अपने शागिर्दों से बात की, “आओ, हम दुबारा यहूदिया चले जाएँ।”
۸. शागिर्दों ने एतिराज़ किया, “उस्ताद, अभी अभी वहाँ के यहूदी आप पर पथराव करने की कोशिश कर रहे थे, फिर भी आप वापस जाना चाहते हैं?”
۹. ईसा' ने जवाब दिया, “क्या दिन में रोशनी के बारह घंटे नहीं होते? जो शख़्स दिन के वक़्त चलता फिरता है वह किसी भी चीज़ से नहीं टकराएगा, क्यूँकि वह इस दुनिया की रोशनी के ज़रिए देख सकता है।
۱۰. लेकिन जो रात के वक़्त चलता है वह चीज़ों से टकरा जाता है, क्यूँकि उस के पास रोशनी नहीं है।”
۱۱. फिर उस ने कहा, “हमारा दोस्त लाज़र सो गया है। लेकिन मैं जा कर उसे जगा दूँगा।”
۱۲. शागिर्दों ने कहा, “ख़ुदावन्द, अगर वह सो रहा है तो वह बच जाएगा।”
۱۳. उन का ख्याल था कि ईसा' लाज़र की दुनयावी नींद का ज़िक्र कर रहा है जबकि हक़ीक़त में वह उस की मौत की तरफ़ इशारा कर रहा था।
۱۴. इस लिए उस ने उन्हें साफ़ बता दिया, “लाज़र की मौत हो गयी है
۱۵. और तुम्हारी ख़ातिर मैं ख़ुश हूँ कि मैं उस के मरते वक़्त वहाँ नहीं था, क्यूँकि अब तुम ईमान लाओगे। आओ, हम उस के पास जाएँ।”
۱۶. तोमा ने जिस का लक़ब जुड़वाँ था अपने साथी शागिर्दों से कहा, “चलो, हम भी वहाँ जा कर उस के साथ मर जाएँ।”
۱۷. वहाँ पहुँच कर ईसा' को मालूम हुआ कि लाज़र को क़ब्र में रखे चार दिन हो गए हैं।
۱۸. बैत-अनियाह का यरूशलम से फ़ासिला तीन किलोमीटर से कम था,
۱۹. और बहुत से यहूदी मर्था और मरियम को उन के भाई के बारे में तसल्ली देने के लिए आए हुए थे।
۲۰. यह सुन कर कि ईसा' आ रहा है मर्था उसे मिलने गई। लेकिन मरियम घर में बैठी रही।
۲۱. मर्था ने कहा, “ख़ुदावन्द, अगर आप यहाँ होते तो मेरा भाई न मरता।
۲۲. लेकिन मैं जानती हूँ कि अब भी खुदा आप को जो भी माँगेंगे देगा।”
۲۳. ईसा' ने उसे बताया, “तेरा भाई जी उठेगा।”
۲۴. मर्था ने जवाब दिया, “जी, मुझे मालूम है कि वह क़यामत के दिन जी उठेगा, जब सब जी उठेंगे।”
۲۵. ईसा' ने उसे बताया, “क़यामत और ज़िन्दगी तो मैं हूँ। जो मुझ पर ईमान रखे वह ज़िन्दा रहेगा, चाहे वह मर भी जाए।
۲۶. और जो ज़िन्दा है और मुझ पर ईमान रखता है वह कभी नहीं मरेगा। मर्था, क्या तुझे इस बात का यक़ीन है?”
۲۷. मर्था ने जवाब दिया, “जी ख़ुदावन्द, मैं ईमान रखती हूँ कि आप ख़ुदा के फ़र्ज़न्द मसीह हैं, जिसे दुनिया में आना था।”
۲۸. यह कह कर मर्था वापस चली गई और चुपके से मरियम को बुलाया, “उस्ताद आ गए हैं, वह तुझे बुला रहे हैं।”
۲۹. यह सुनते ही मरियम उठ कर ईसा' के पास गई।