एक साल में बाइबल
मार्च २५


लैव्यव्यवस्था २६:१-४६
१. “अपने मूर्तियाँ मत बनाओ। मूर्तियाँ या यादगार के पत्थर स्थापित मत करो। अपने देश में उपासना करने के लिए पत्थर की मूर्तियाँ स्थापित न करो। क्यों कियोंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ!
२. “मेरे आराम के विशेष दिनों को याद रखो और मेरे पवित्र स्थान का सम्मान करो। मैं यहोवा हूँ!
३. “मेरे नियमों और आदेशों को याद रखो और उनका पालन कोर।
४. यदि तुम ऐसा करोगे तो मैं जिस समय वर्षा आनी चाहिए, उसी समय वर्षा कराऊँगा। भूमि फ़सलें पैदा करेंगी और पेड़ अपने फवल देंगे।
५. तुम्हारा अनाज निकालने का काम तब तक जलेगा जब तक अँगूर इकट्ठा करने का समय आएगा और अँगूर का इकट्ठा करना तब तक चलेगा जब तक बोने का समय आएगा। तब तुम्हारे पास खाने के लिए बहुत होगा, और तुम अपने प्रदेश में सुरक्षित रहोगे।
६. में तुम्हारे देश को शान्ति दूँगा। तुम शान्ति से सो सकोगे। कोई वयक्ति भयभीत करने नहीं आएगा। मैं विनाशकारी जानवरों को तुम्हारे देश से बाहर रखूँगा। और सेनाएँ तुम्हारे देश से नहीं गुजरेंगी।
७. “तुम अपने शत्रुओं को पीछा करके भाओगे और उन्हें रहाओगे। तुम उन्हें अपनी तलवार से मार डालोगे।
८. तुम्हारे पाँच व्यक्ति सौ व्यक्तियों को पीछा कर के भगाएंगे और तुम्हारे सौ व्यक्ति हजार व्यक्तियों का पीछा करेंगे। तुम अपने शुत्रओं को हराओगै और उन्हें तलवार से मार डालोगे।
९. “तब मेंम तुम्हारी ओर मुड़ूँगा मैं तुम्हें बहुत से बच्चों वाला बनाऊँगा। मैं तुम्हारे साथ अपनी वाचा का पालन करूँगा।
१०. तुम्हारे पास एक वर्ष से अधिक चलने वाली पर्याप्त पैदावार रहेगी। तुम नयी फसल काटोगे। किन्तु तब तुम्हें पुरानी पैदावार नयी पैदावार के लिए जगह बनाने हेतुत फेंकनी पड़ेगी।
११. तुम लोगों के बीच मैं अपना पवित्र तम्बू रखूँगा। मैं तुम लोगों से अलग नहीं होऊँगा।
१२. [This verse may not be a part of this translation]
१३. [This verse may not be a part of this translation]
१४. “किन्तु यदि तुम मेरी आज्ञा का पालन नहीं करोगे और मरे ये सब आदेश नहीं मानोगे तो ये बुरी बातें होंगी।
१५. यदि तुम मेरे नियमों और आदेशों को मानना अस्वीकार करते हो तो तुमने मेरी वाचा को तोड़ दिया है।
१६. यदि तुम ऐसा करते हो तो मैं ऐसा करूँगा कि तुम्हारा भयंकर अनिष्ट होगा। मैं तुमको असाध्य रोग और तुम्हारा जीवन ले लेंगे। जब तुम अपने बीज बोओगे तो तुम्हें सफलता नहीं मिलेगी। तुम्हारी पैदावार तुम्हारे शुत्र खाएंगे।
१७. मैं तुम्हारे विरुद्ध होऊँगा, अत: तुम्हारे शत्रु तुमको हराएँगे। वे शत्रु तुमसे घृणा करेंगे और तुमहारे ऊपर शासन करेंगे। तुम तब भी भागोगेष जब तुम्हारा पीछा कोई न कर रहा होगा।
१८. “यदि इस के बाद भी तुम मेरी आज्ञा पालन नहीं करते हो तो मैं तुम्हारे पापों के लिए सात गुना अधिक दण्ड दूँगा।
१९. मैं उन बड़े नगरों को भी नष्ट करूँगा जो तुम्हें गर्वीला बनाते हैं। आकाश वर्षा नहीं देगा और धरती पैदावार नहीं उत्पन्न करेगी।
२०. तुम कठोर परिश्रम करोगा, किन्तु इससे कुछ भी नहीं होगा। तुम्हारी भूमि में कोई पैदावार नहीं होगी और तुम्हारे पेड़ों पर फल नहीं आएंगे।
२१. “यदि तब बी तुम मेरे विरुद्ध जाते हो और मेरी आज्ञा का पालन करना अस्वीकार करते हो तो मैं सात गुना कठोरता से मारूँगा। जितना अधिक पाप करोगे उतना अधिक दण्ड पाओगे।
२२. मैं तुम्हारे विरुद्ध जंगली जानवरों को भेजूँगा। वे तुम्हारे बच्चों को तुमसे छीन ले जाएगें। वे तुम्हारे मवेशियों को नष्ट करेंगे। वे तुम्हारी संख्या बहुत कम कर देंगे। लोग यात्रा करने से भय खाएंगे, सड़कें खाली हो जाएंगी!
२३. “यदि उन चीज़ों के होने पर भी तुम्हें सबक नहीं मिलता और तुम मेरे विरुद्ध जाते हो ,
२४. तो मैं तुम्हारे विरुद्ध होऊँगा। मैं, हाँ, मैं (यहोवा), तुम्हारे पापों के लिए तुम्हें सात गुना दण्ड दूँगा।
२५. तुमने मेरी वाचा तोड़ी है, अतः मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। मैं तुम्हारे विरुद्ध सेनाएँ भेजूँगा। तुम सुरक्षा के लिए अपने नगरों में जाओगे। किन्तु मैं ऐसा करूँगा कि तुम लोगों में बीमारियाँ फैलें। तब तुमहारे शत्रु तुमहे हराएंगे।
२६. मैं उस नगर में छोड़े गे अन्न का एक भाग तुम्हें दूँगा। किन्तु खाने के लिए बहुत कम अन्न रहेगा। दस स्त्रियाँ अपनी सभी रोटी एक चूल्हे में पका सकेंगी। वे रोटी के हर एक टुकड़े को नापेंगी। तुम खओगे, किन्तु फिर भी भूखे रहोगे!
२७. “यदि तुम इतने पर भी मरी बातें सुनना अस्वीकार करते हो, और मेरे विरुद्ध रहते हो
२८. तो मैं वस्तुत: अपना क्रोध प्रकट करूंगा! मैं, हाँ, मैं (यहोवा) तुम्हें तुम्हारे पापों के लिए सात गुना दण्ड दूँगा।
२९. तुम अपने पुत्र पुत्रियों के शरीरों को खाओगे।
३०. मैं तुम्हारे ऊँचे स्थानों को नष्ट करूँगा। मैं तुम्हारी सुगन्धित वेदियों को काट डालूँगा। मैं तुमहारे शवों को तुमहारी निर्जीव मूर्तियों के शवों पर डालूँगा। तुम मुझको अत्यन्त घोनौने लगोगे।
३१. मैं तुम्हारे नगरों को नष्ट करूँगा। मैं ऊँचे पवित्र स्थानों को खाली कर दूँगा। मैं तुम्हारी भेंटों की मधुर सुगन्ध को नहीं लूँगा।
३२. मैं तुम्हारे देश को इतना खाली कर दूँगा की तुम्हारे शत्रु तक जो इसमें रहने आएंगे, वे इस पर चकित होंगे।
३३. और मैं तुम्हें विभिन्न प्रदेशों में बिखेर दूँगा। मैं अपनी तलवार खीचूँगा और तुम्हें नष्ट करूँगा। तुमहारी भूमि ख़ाली हो जाएगी और तुम्हारे नगर उजाड़ हो जाएंगे।
३४. “तुम अपने शत्रु के देशों में ले जाये जाओगे। तुमहारी धरती खाली हो जायेगी और वह अंत में उस विश्राम को पायेगी।
३५. जिसे तुमने उसे तब नहीं दिया था जब तुम उस पर रहते थे।
३६. बचे हुए व्यक्ति अपने शत्रुओं के देश में अपना साहस खो देंगे। वह हर चीज से भयभीत होंगे। वह हवा में उड़ती पत्ती की तरह चारोंम ओर भागेंगें। वे ऐसे भागेंगे मानों कोई तलवरा लिए उनका पीछा कर रहा हो।
३७. वे एक दूसरे पर तब भी गिरेंगे जब कोई भी उनका पीछा नहीं कर रहा होगा। “तुम इतने शक्तिशाली नहीं रहोगे कि अपने शत्रुओं के मुकाबले खड़े रह सको।
३८. तुम अन्य लोगों मेम विलीन हो जाओगे। तुम अपने शत्रुओं के देश में लुप्त हो जाओगे।
३९. इस प्रकार तुमहारी सन्तानें तुम्हारे शत्रुओं के देश में अपने पापों में सड़ेंगी। वे अपने पापों में ठीक वैसे ही सड़ेंगी जैसे उनके पूर्वज सड़े।
४०. “सम्भव है कि लोग अपने पाप स्वीकार करें और वे अपने पूर्वजों के पापों को सवीकार करेंगे। सम्भव हे वे यह स्वीकार करें कि वे मेरे विरुद्ध हुए सम्भव है वे यह स्वीकार करें कि उन्होंने मेरे विरुद्ध पाप किया है।
४१. सम्भव है कि वे स्वीकार करें कि मैं उनके विरुद्ध हुआ और उन्हें उनके शत्रुओं के देश में लाया। उन लोगों ने मेरे साथ अजनबी का सा व्यवहार किया। यदि वे विनम्र हो जाएं और अपने पापों के लिए दण्ड स्वीकर करें
४२. तो मैं याकूब के साथ के अपनी वचा को याद करूँगा। इसहाक के साथ के अपनी वाचा को याद करुँगा। इब्राहिम के साथ की गी वाचा को मैं याद करूँगा और मैं उस भूमि को याद करूँगा।
४३. “भूमि खाली रहेगी। भूमि आराम के साय का आनन्द लेगी। तब तुम्हारे बचे हुए लोग अपने पाप के लिए दण्ड स्वीकार करेगें। वे सीखेंगे कि उन्हें इसलिए दण्ड मिला कि उन्होंने मेर व्यवस्था से घृणा की और नियमों का पालन करना अस्वीकार किया।
४४. उन्होंने सचमुच पाप किया। किन्तु यदि वे मेरे पास सहायता के लिए आते हैं तो मैं उनसे दूर नहीं रहूँगा। मैं उनकी बातें तब भी सुनूँगा जब वे अपने शत्रुओं के देश में भी होगें। मैं उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं करूँगा। मैं उके साथ अपनी वाचा को नहीं तोड़ूँगा। क्यों? क्योंकि में उनका परमेश्वर यहोवा हूँ।
४५. मैं उनके पूर्वजों के साथ की गी वाचा को याद रखूँगा। मैं उनके पूर्वजों को इसलिए मिस्र स् बाहर लाया कि मैं उका परमेश्वर हो सकूँ। दूसरे राष्ट्रों ने उन बातों को देखा। मैं यहोवा हूँ।”
४६. येवे विधियाँ, नियम और व्यवस्थाएं हैं जिन्हें यहोवा ने इस्राएल के लोगों को दिया। वे नियम इस्राएल केके लोगों और यहोवा के बीज वाचा है। यहोवा ने उन नियमों को सीनै पर्वत पर दिया था। उसने मूसा को नियम दिए और मूसा ने उन्हें लोगों को दिया।

लैव्यव्यवस्था २७:१-३४
१. यहोवा ने मूसा से कहा,
२. “इस्राएल के लोगों से कहो : कोई व्यक्ति यहोवा को विशेष वचन दे सकता है। वह व्यक्ति यहोवा को किसी व्यक्ति को अर्पित करने का वचन दे सकता है। वह व्यक्ति यहोवाक की सेवा विशेष ढंग से करेगा। याजक उस व्यक्ति के लिए विशेष मूल्य निश्चित करेगा। यदि लोग उसे यहोवा से वापस खरीदना चाहते हैं तो वे मूल्य देंगे।
३. बीस से साठ वर्ष तक की आयु के पुरुष का मूल्य पचास शेकेल चाणदी होगी। (तुम्हें चाँदी को तोलने के लिए पवित्र स्थान से प्रामाणिक शेकेल का उपयोग करना चाहिए।)
४. बीस से साठ वर्ष की आयु की स्त्री का मूल्य तीस शेकेल है।
५. पाँच से बीस वर्ष आयु के पुरुष का मूल्य बीस शेकेल है। पाँच से बीस वर्ष आयु की स्त्री का मूल्य दस शेकेल है।
६. एक महीने से पाँच महीने तक के बालक का मूल्य पाँच शेकेल है। एक बालिका का मूल्य तीन शेकेल है।
७. साठ या साठ से अधिक आयु के पुरूष का मूल्य पन्द्रह शेकेल है। एक स्त्री का मूल्य दस शेकेल है।
८. “यदि व्यक्ति इतना गरीबत है कि मूल्य देने में असमर्थ है तो उस व्यक्ति को याजक के सामने लाओ। याजक यह निश्चित करेगा कि वह व्यक्ति कितना मूल्य भुगता में दे सकता है।
९. “कुछ जानवरों का उपयोग यहोवा की बलि के रूप में किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति उन जानवरों में से किसी को लाता है तो वह जानवर पवित्र हो जाएगा।
१०. वह व्यक्ति यहोवा को उस जानवर को देने का वचन देता है। इसलिए उस व्यक्ति को उस जानवर के स्थान पर दूसरा जानवर रखने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए। उसे अच्छे जानवर को बुरे जानवर से नहीं बदलना चाहिए। उसे बुरे जानवर को अच्छे जानवर से नहीं बदलना चाहिए। यदि वह व्यक्ति दोनों जानवरों को बदलना ही चाहता है तो दोनों जानवर पवित्र हो जाएगें। दोनों जानवर यहोवा के हो जाएंगे।
११. “कुछ जानवर यहोवा को बलि के रूप में नहीं भेंट किए जा सकेत। यदि कोई व्यक्ति उन अशुद्ध जानवरों में से किसी को यहोवा के लिए लाता है तो वह जानवर याजक के सामने लाया जाना चाहिए।
१२. याजक उस जानवर का मूल्य निश्चित करेगा। इससे कोई जानवर नहीं कहा जाएगा कि वह जानवर अच्छा है या बूरा, यदि याजक मूल्य निश्चित कर देता है तो जानवर का वही मूल्य है।
१३. यदि व्यक्ति जानवर को वापस खरीदना चाहता है1 तो उसे मूल्य में पाँचवाँ हिस्सा और जोड़ना चाहिए।
१४. “यदि कोई व्यक्ति अपने मकान को पवित्र मकान के रूप में यहोवा को अर्पित करता है तो याजक को इसका मूल्य निश्चित करना चाहिए। इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता कि मकान अच्छा है या बुरा, यदि याजक मूल्य निश्चित करता है तो वही मकान का मूल्य है।
१५. किन्तु वह व्यक्ति जो मकान अर्पित करता है यदि उसे वापस खरीदना चाहता है तो उसे मूल्य में पाँचवाँ हिस्सा जोड़ना चाहिए। तब घर उस व्यक्ति का हो जाएगा।
१६. “यदि कोई व्यक्ति अपने खेत का कोई भाग यहोवा को अर्पित करता है तो उन खेतों का मूल्य उनको बोने के लिए आवश्यक बीज पर आधारित होगा। एक होमेर जौ के बीज की कीमत चाँदी के पचास शेकेल होगी।
१७. यदि व्यक्ति जुबली के वर्ष खेत का दान करता है तब मूल्य वह होगा जो याजक निश्चित करेगा।
१८. किन्तु व्यक्ति यदि जुबलि का बाद खेत का दान करता है तो याजक को वास्तविक मूल्य निश्चित करना चाहिए। उसे अगले जुबली वर्ष तक के वर्षों को गिनना चाहिए। तब वह उस गणना का उपयोग मूल्य निश्चित करे के लिए करेगा।
१९. यदि खेत दान देने वाला व्यक्ति खेत को वापस खरीदना चाहे तो उसके मूल्य में पाँचवाँ भाग और जोड़ा जाएगा।
२०. यदि वह व्यक्ति खेत को वापस नहीं खरीदता है तो खेत सदैव याजकों का होगा। यदि खेत किसी अन्य को बचा जाता है तो पहलपा व्यक्ति उसे पापस नहीं खरीद सकता ।
२१. “यदि व्यक्ति खेत को वापस नहीं खरीदता है तो जुबली के वर्ष खेत केवल यहोवा के लिए पवित्र रहेगा। यह सदैव याजकों का रहेगा। यह उस भूमि की तरह होगा जो पूरी तरह यहोवा को दे दी गई हो।
२२. “यदि कोई अपने खरीदे खेत को यहोवा को अर्पित करता है जो उसकी निजी सम्पत्ति का भाग नहीं है।
२३. तब याजक को चुबली के वर्ष तक वर्षों को गिनना चाहिए और खेत का मूल्य निश्चित करना चाहिए। तब वह खेत योहवा का होगा।
२४. जुबली के वर्ष वह खेत मूल भूस्वामी के पास चला जाएगा। वह उस पर्वार को जाएगा जो उसका स्वामी है।
२५. “तुम्हें पवित्र स्थान से प्रामाणिक शेकेल का उपयोग उन मूल्यों को अदा करने के लिए करना चाहिए। पवित्र स्थान के प्रामाणिक शेकेल का तोल बीस गेरा है।
२६. “लोग मवेशियों और भेड़ों को यहोवा को दान दे सकते हैं, किन्तु यदि जानवर पहलौठा है तो वह जानवर जनम से ही यहोवा का है। इसलिए लोग पहलौठा जानवर का दान नहीं कर सकते।
२७. लोगों को पहलौठा जानवर यहोवा को देना चाहिए। किन्तु यदि पलौठा जानवर अशुद्ध है तो व्यक्ति को उस जानवर को वापस खरीदना चाहिए। याजक उस जानवर का मूल्य निश्चित करेगा और व्यक्ति को उस मूल्य का पाँचवाँ भाग उसमें जोड़ना चाहिए। यदि व्यक्ति जानवर को वापस नहीं खरीदता तो याजक को अपने निश्चित किए गाए मूल्य पर उसे बेच देना चाहिए।
२८. “एक विशेष प्रकार की भेट है जिसे लोग योहवा को चढ़ाते हैं। वह भेंट पूरी तरह यहोवा की है। वह भेंट न तो वापस खरीदी जा सकती है न ही बेची जा सकती है। वह भेंट यहोवा की है। उस प्रकार की भेटें ऐसे लोग, जानवर और खेत हैं, जो परिवार की सम्पत्ति है।
२९. यदि वह विशेष प्रकार की योहवा को भेंट कोई व्यक्ति है तो उसे वापस खरीदा नहीं जा सकता। उसे अवश्य मार दिया जाना चाहिए।
३०. “सभी पैदावारों का दसवाँ भाग यहोवा का है। इसमें खेतों ,फसले और पेड़ों के फल सम्मिलित हैं। वह दसवाँ भाग यहोवा का है।
३१. इसलिए यदि कोई व्यक्ति अपना दसवाँ भाग वापस लेना चाहता है तो उसेक मूल्य का पाँचवाँ भाग उसमें जोड़ना चाहिए और वापस खरीदना चाहिए।
३२. “याजक व्यक्तियों के मवेशियों और भेड़ों में से हर दसवाँ जानवर लेगा। हर दसवाँ जानवर यहोवा का होगा।
३३. मालिक को यह चिन्ता नहीं करनी चाहिए कि वह जानवर अच्छा है या बुरा। उसे जानवर को अन्य जानवर से नहीं बदलना चाहिए। यदि वह बदलने का निश्चय करता है तो दोनों जानवर यहोवा के होंगे। वह जानवर वापस नहीं खरीदा जा सकता।”
३४. ये वे आदेश हैं जिन्हें यहोवा ने सीनैं पर्वत पर मूसा को दिये। ये आदेश इस्राएल के लोगों के लिए हैं।

भजन संहिता २९:१-६
१. परमेश्वर के पुत्रों, यहोवा की स्तुति करो! उसकी महिमा और शक्ति के प्रशंसा गीत गाओ।
२. यहोवा की प्रशंसा करो और उसके नाम को आदर प्रकट करो। विशेष वस्त्र पहनकर उसकी आराधना करो।
३. समुद्र के ऊपर यहोवा की वाणी निज गरजती है। परमेश्वर की वाणी महासागर के ऊपर मेघ के गरजन की तरह गरजता है।
४. यहोवा की वाणी उसकी शक्ति को दिखाती है। उसकी ध्वनि उसके महिमा को प्रकट करती है।
५. यहोवा की वाणी देवदार वृक्षों को तोड़ कर चकनाचूर कर देता है। यहोवा लबानोन के विशाल देवदार वृक्षों को तोड़ देता है।
६. यहोवा लबानोन के पहाड़ों को कँपा देता है। वे नाचते बछड़े की तरह दिखने लगता है। हेर्मोन का पहाड़ काँप उठता है और उछलती जवान बकरी की तरह दिखता है।

नीतिवचन १०:२२-२५
२२. यहोवा के वरदान से जो धन मिलता है, उसके साथ वह कोई दुःख नहीं जोड़ता।
२३. बुरे आचार में मूढ़ को सुख मिलता, किन्तु एक समझदार विवेक में सुख लेता है।
२४. जिससे मूढ़ भयभीत होता, वही उस पर आ पड़ेगी, धर्मी की कामना तो पूरी की जायेगी।
२५. आंधी जब गुज़रती है, दुष्ट उड़ जाते हैं, किन्तु धर्मी जन तो, निरन्तर टिके रहते हैं।

मरकुस ७:१-१३
१. तब फरीसी और कुछ धर्मशास्त्री जो यरुशलेम से आये थे, यीशु के आसपास एकत्र हुए।
२. उन्होंने देखा कि उसके कुछ शिष्य बिना हाथ धोये भोजन कर रहे हैं।
३. क्योंकि अपने पुरखों की रीति पर चलते हुए फरीसी और दूसरे यहूदी जब तक सावधानी के साथ पूरी तरह अपने हाथ नहीं धो लेते भोजन नहीं करते।
४. ऐसे ही बाज़ार से लाये खाने को वे बिना धोये नहीं खाते। ऐसी ही और भी अनेक रुढ़ियाँ है, जिनका वे पालन करते हैं। जैसे कटोरों, कलसों, ताँबे के बर्तनों को माँजना, धोना आदि।
५. इसलिये फरीसियों और धर्मशास्त्रियों ने यीशु से पूछा-”तुम्हारे शिष्य पुरखों की परम्परा का पालन क्योंनहीं करते? बल्कि अपना खाना बिना हाथ धोये ही खा लेते हैं।”
६. यीशु ने उनसे कहा, “यशायाह ने तुम जैसे कपटियों के बारे में ठीक ही भविष्यवाणी की थी। जैसा कि लिखा है: ‘ये मेरा आदर केवल होठों से करते है, पर इनके मन मुझसे सदा दूर है।
७. मुझको इनकी उपासना अर्पित है बिना काम की; और ये मेरी व्यर्थ उपासना करते हैं। क्योंकि ये लोगों को मनुष्यों के बनाये सिद्धान्त को धार्मिक नियम के रूप में सिखाते हैं।’यशायाह 29:13
८. तुमने परमेश्वर का आदेश उठाकर एक तरफ रख दिया है और तुम मनुष्यों की परम्परा का सहारा ले रहे हो।”
९. उसने उनसे कहा, “तुम परमेश्वर के आदेशों को टालने में बहुत चतुर हो गये हो ताकि तुम अपनी रूढ़ियों को स्थापना कर सको!
१०. उदाहरण के लिये मूसा ने कहा, ‘अपने माता-पिता का आदर कर’ और ‘जो कोई पिता या माता को बुरा कहे, उसे निश्चय ही मार डाला जाये।’
११. पर तुम कहते हो कि यदि कोई व्यक्ति अपने माता-पिता से कहता है कि मेरी जिस किसी वस्तु से तुम्हें लाभ पहुँच सकता था, मैंने परमेश्वर को समर्पित कर दी है।’
१२. तो तुम उसके माता-पिता के लिये कुछ भी करना समाप्त कर देने की अनुमति देते हो।
१३. इस तरह तुम अपने बनाये रीति-रिवाजों से परमेश्वर के वचन को टाल देते हो। ऐसी ही और भी बहुत सी बातें तुम लोग करते हो।”