एक साल में बाइबल
जुलाई २२


1 इतिहास २६:१-३२
१. द्वारपालों के समूहः कोरह परिवार से ये द्वारपाल हैं। मशेलेम्याह और उसके पुत्र। (मशेलेम्याह कोरह का पुत्र था। वह आसाप परिवार समूह से था।)
२. मशेलेम्याह के पुत्र थे। जकर्याह सबसे बड़ा पुत्र था। यदीएल दूसरा पुत्र था। जबद्याह तीसरा पुत्र था। यतीएल चौथा पुत्र था।
३. एलाम पाँचवाँ पुत्र था। यहोहानान छठाँ पुत्र था और एल्यहोएनै सातवाँ पुत्र था।
४. ओबेदेदोम और उसके पुत्र। ओबेदेदोन का सबसे बड़ा पुत्र शमायाह था। यहोजाबाद उसका दूसरा पुत्र था। योआह उसका तीसरा पुत्र था। साकार उसका चौथा पुत्र था। नतनेल उसका पाँचवाँ पुत्र था।
५. अम्मीएल उसका छठाँ पुत्र था। इस्साकार उसका सातवाँ पुत्र था और पुल्लतै उसका आठावाँ पुत्र था। परमेश्वर ने सचमुच ओबेदेदोम को वरदान दिया।
६. ओबेदेदोम का पुत्र शमायाह था। शमायाह के भी पुत्र थे। शमायाह के पुत्र अपने पिता के परिवार में प्रमुख थे क्योंकि वे वीर योद्धा थे।
७. शमायाह के पुत्र ओती, रपाएल, ओबेद, एलजाबाद, एलीहू और समक्याह थे। एलजाबाद के सम्बन्धी कुशल कारीगर थे।
८. वे सभी लोग ओबेदेदोम के वंशज थे। वे पुरुष और उनके पुत्र तथा उनेक सम्बन्धी शक्तिशाली लोग थे। वे अच्छे रक्षक थे। ओबेदेदोम के बासठ वंशज थे।
९. मशेलेम्याह के पुत्र और सम्बन्धी शक्तिशाली लोग थे। सब मिलाकर अट्ठारह पुत्र और सम्बन्धी थे।
१०. मरारी के पिरवार से ये द्वारपाल थे उनमें एक होसा था। शिम्री प्रथम पुत्र चुना गया था। शिम्री वास्तव में सबसे बड़ा नहीं था, किन्तु उसके पिता ने उसे पहलौठा पुत्र चुन लिया था।
११. हिल्किय्याह उसका दुसरा पुत्र था। तबल्याह उसका तीसरा पुत्र था और जकर्याह उसका चौथा पुत्र था। सब मिलाकर होसा के तेरह पुत्र और सम्बन्धी थे।
१२. ये द्वारपालों के समूह के प्रमुख थे। द्वारपालों का यहोवा के मन्दिर में सेवा करने का विशेष ढंग था, जैसा कि उनेक सम्बन्धी करते थे।
१३. हर एक परिवार को एक द्वार रक्षा करने के लिये दिया गया था। एक परिवार के लिये द्वार चुनने को गोट डाली जाती थी। बुढ़े और जवानों के साथ एक समान बर्ताव किया जाता था।
१४. शेलेम्याह पूर्वी द्वार की रक्षा के लिये चुना गया था। तब शेलेम्याह के पुत्र जकर्याह के लिये गोट डाली गई। जकर्याह एक बुद्धिमान सलाहकार था। जकर्याह उत्तरी द्वार के लिये चुना गया।
१५. ओबेदोम दक्षिण द्वार के लिये चुना गया और ओबेदेदोम के पुत्र उस गृह की रक्षा के लिये चुने गए जिसमें कीमती चीजें रखी जाती थीं।
१६. शुप्पीम और होसा पश्चिमी द्वार और ऊपरी सड़क पर शल्लेकेत द्वार के लिये चुने गए। द्वारपाल एक दूसरे की बगल में खड़े होते थे।
१७. पूर्वी द्वार पर लेवीवंशी रक्षक हर दिन खड़े होते थे। उत्तरी द्वार पर चार लेवीवंशी रक्षक खड़े होते थे। दक्षिणी द्वार पर चार लेवीवंशी रक्षक खड़े होते थे और दो लेवीवंशी रक्षक उस गृह की रक्षा करते थे और कीमती चीजें रखी जाती थीं।
१८. चार रक्षक पश्चिमी न्यायगृह पर थे और दो रक्षक न्यायगृह तक की सड़क पर थे।
१९. ये द्वारपालों के समूह थे। वे द्वारपाल कोरह और मरारी के परिवार में से थे।
२०. आहिय्याह लेवी के परिवार समूह से था। अहिय्याह परमेश्वर के मन्दिर की मूल्यावान चीजों की देखभाल का उत्तरदायी था। अहिय्याह उन स्थानों की रक्षा के लिये भी उत्तरदायी था जहाँ पवित्र वस्तुएँ रखी जाती थी।
२१. लादान गेर्शोन परिवार से था। यहोएल लादान परिवार समूह के प्रमुखों में से एक था।
२२. यहोएला के पुत्र जेताम और जेताम का भाई योएल थे। वे यहोवा के मन्दिर में बहुमूल्य चीज़ों के लिये उत्तरदायी थे।
२३. अन्य प्रमुख अम्राम, यिसहार, हेब्रोन ओर उज्जीएल के परिवार समूह से चुने गए थे।
२४. शबूएल यहोवा के मन्दिर में मूल्यवान चीजों की रक्षा का उत्तरदायी प्रमुख था। शबूएल गेर्शेम का पुत्र था। गेर्शोम मूसा का पुत्र था।
२५. ये शबूएल के सम्बन्धी थेः एलीआजर से उसके सम्बन्धी थेः एलीआजह का पुत्र रहब्याह, रहब्याह का पुत्र यशायाह, यशायाह का पुत्र योराम, योराम का पुत्र जिक्री और जिक्री का पुत्र शलोमोत।
२६. शलोमोत और उसके सम्बन्धी उन सब चीज़ों के लिये उत्तरदायी थे जिसे दाऊद ने मन्दिर के लिये इकट्ठा किया था। सेना के अधिकारियों ने भी मन्दिर के लिये चीजें दीं।
२७. उन्होंने युद्धों में ली गयी चीजों में से कुछ चीजे दीं। उन्होंने यहोवा के मन्दिर को बनाने के लिये वे चीजें दीं।
२८. शलोमोत और उसके सम्बन्धी दृष्टा शमूएल, कीश के पुत्र शाऊल, नेर के पुत्र अब्नेर सरूयाह के पुत्र योआब द्वारा दी गई पवित्र वस्तुओं की भी रक्षा करते थे। शलोमोत और उसके सम्बन्धी लोगों द्वारा, यहोवा को दी गई सभी पवित्र चीज़ों की रक्षा करते थे।
२९. कनन्याह यिसहार परिवार का था। कनन्याह और उसके पुत्र मन्दिर के बाहर का काम करते थे। वे इस्राएल के विभिन्न स्थानों पर सिपाही और न्यायाधीश का कार्य करते थे।
३०. हशव्याह हेब्रोन परिवार से था। हशव्याह और उसके सम्बन्धी यरदन नदी के पश्चिम में इस्राएल के राजा दाऊद के कामों और यहोवा के सभी कामों के लिये उत्तरदायी थे। हशव्याह के समूह में एक हजार सात सौ शक्तिशाली व्यक्ति थे।
३१. हेब्रोन का परिवार समूह इस बात पर प्रकारश डालता है कि यरिय्याह उनका प्रमुख था। जब दाऊद चालीस वर्ष तक राजा रह चुका, तो उसने अपने लोगों को परिवार के इतिहासों से शक्तिशाली और कुशल व्यक्तियों की खोज का आदेश दिया। उनमें से कुछ हेब्रोन परिवार में मिले जो गिलाद के याजेर नगर में रहते थे।
३२. यरिय्याह के पास दो हजार सात सौ सम्बन्धी थे जो शक्तिशाली लोग थे और परिवारों के प्रमुख थे। दाऊद ने उन दो हजार सात सौ सम्बन्धियों को रूबेन, गाद और आधे मनश्शे के परिवार के संचालन और यहोवा एवं राजा के कार्य का उत्तरदायित्व सौंपा।

1 इतिहास २७:१-३४
१. यह उन इस्राएली लोगों की सूची है जो राजा की सेना में सेवा करते थे। हर एक समूह हर वर्ष एक महीने अपने काम पर रहता था। उसमें परिवारों के शासक, नायक, सेनाध्यक्ष और सिपाही लोग थे जो राजा की सेवा करते थे। हर एक सेना के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
२. याशोबाम पहले महीने के पहले समूह का अधीक्षक था। याशोबाम जब्दीएल का पुत्र थआ। याशोबम पेरेस के वंशजों में से एक था। याशोबाम पहले महीने के लिये सभी सैनिक अधिकारियों का प्रमुख था।
३. याशोबाम पेरेस के वंशजों में से एक था। याशोबाम पहले महीने के लिये लभी सैनिक अधिकारियों का प्रमुख था।
४. दोदै दूसरे महीने के लिये सेना समूह का अधीक्षक था। वह अहोही से था। दोदै के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
५. तीसरा सेनापति बनायाह था। बनायाह तीसरे महीने का सेनापति था। यहोदा का पुत्र था। बनायाह यहोयादा का पुत्र था। यहोयादा प्रमुख याजक था। बनायाह के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
६. यह वही बनायाह था जो तीस वीरों में से एक वीर सैनिक था। बनायाह उन व्यक्तियों का संचालन करता था। बनायाह का पुत्र अम्मीजाबाद बनायाह के समूह का अधीक्षक था।
७. चौथा सेनापति असाहेल था। असाहेल चौथे महीने का सेनापति था। असाहेल योआब का भाई था। बाद में, असाहेल के पुत्र जबद्याह ने उसका स्थान सेनापति के रूप में लिया। आसाहेल के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
८. पाँचवाँ सेनापति शम्हूत था, शम्हूत पाँचवें महीने का सेनापति था। शम्हूत यीज्राही के परिवार से था। शम्हूत के समूह में चौबीस हजार व्यक्ति थे।
९. छठाँ सेनापति ईरा था। ईरा छठें महीने का सेनापति था। ईरा इक्केश का पुत्र था। इक्केश तकोई नगर से था। ईरा के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
१०. सातवाँ सेनापति हेलेस था। हेलेस सातवें महीने का सेनापति था।वह पेलोनी लोगों से था और एप्रैम का वंशज था। हेलेस के समुह में चौबीस हजार पुरुष थे।
११. सिब्बकै आठवाँ सेनापति था। सिब्बकै आठवें महीने का सेनापति था। सिब्बकै हूश से था। सिब्बकै जेरह परिवार का था। सिब्बकै के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
१२. नवाँ सेनापति अबीएजेर था। अबीएजेर नवें महीने का सेनापति था। अबीएजेर अनातोत नगर से था। अबीएजर बिन्यामीन के परिवार समूह का था। अबीएजेर के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
१३. दसवाँ सेनापति महरै था। महरै दसवें महीने का सेनापति था। महरै नतोप से था। वह जेरह परिवार का था। महरै के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
१४. ग्यारहवाँ सेनापति बनायाह था। बनायाह ग्यारहवें महीने का सेनापति था। बनायाह पिरातोन से था। बनायाह एप्रैम के परिवार समूह का था। बनायाह के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
१५. बारहवाँ सेनापति हेल्दै था। हेल्दै बारहवें महीने का सेनापति था। हेल्दै, नतोपा, नतोप से था। हलदै ओत्नीएल का परिवार का था। हल्दै के समूह में चौबीस हजार पुरुष थे।
१६. इस्राएल के परिवार समूहों के प्रमुख ये थेः रूबेनः जिक्री का पुत्र एलीआजर। शिमोनः माका का पुत्र शपत्याह।
१७. लेवीः शमूएल का पुत्र हशव्याह। हारूनः सादोक।
१८. यहूदाः एलीहू(एलीहू दाऊद के भाईयों में से एक था।) इस्साकारः मीकाएल का पुत्र ओम्नी।
१९. जबूलूनः ओबद्याह का पुत्र यिशमायाह, नप्तालीः अज्रीएल का पुत्र यरीमोत।
२०. एप्रैमः अज्जयाह का पुत्र होशे। पश्चिमी मनश्शेः फ़ादायाह का पुत्र योएल।
२१. पूर्वी मनश्शेः जकर्याह का पुत्र इद्दो। बिन्यामीनः अब्नेर का पुत्र यासीएल।
२२. दानः यारोहाम का पुत्र अजरेल। वे इस्राएल के परिवार समूह के प्रमुख थे।
२३. दाऊद ने इस्राएल के लोगों की गणना का निश्चय किया। वहाँ बहुत अधिक लोग थे क्योंकि परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को आसमान के तारों के बराबर बनाने की प्रतिज्ञा की थी। अतः दाऊद ने बीस वर्ष और उससे ऊपर के पुरुषों की गणना की।
२४. सरूयाह के पुत्र योआब ने लोगों को गनना आरम्भ किया। किन्तु उसने गणना को पूरा नहीं किया। परमेश्वर इस्राएल के लोगों पर क्रोधित हो गया। यही कारण है कि लोगों की संख्या ‘राजा दाऊद के इतिहास’ की पुस्तक में नहीं लिखी गई।
२५. यह उन व्यक्तियों की सूची है जो राजा की सम्पत्ति के लिये उत्तरदायी थेः अदीएल का पुत्र अजमावेत राजा के भण्डारों का अधीक्षक था। उज्जीय्याह का पुत्र यहोनातान छोटे नगरों के भण्डारों, गाँव, खेतों और मीनारों का अधीक्षक था।
२६. कलूब का पुत्र एज्री कृषि-मजदूरों का अधीक्षक था।
२७. शिमी अंगूर के खेतों का अधीक्षक था। शिमी रामा नगर का था। जब्दी अंगूर के खेतों से आने वाली दाखमधु की देखभाल और भंडारण करने का अधीक्षक था। जब्दी शापाम का था।
२८. बाल्हानान पश्चिमी पहाड़ी प्रदेश में जैदून और देवदार वृक्षों का अधीक्षक था। बाल्हानान गदेर का था। योआश जैतून के तेल के भंडारण का अधीक्षक था।
२९. शित्रै शारोन क्षेत्र में पशूओं का अधीक्षक था। शित्रै शारोन क्षेत्र का था। अदलै का पुत्र शापात घाटियों में पशुओं का अधीक्षक था।
३०. ओबील ऊँटों का अधीक्षक था। ओबील इश्माएली था। येहदयाह गधों का अधीक्षक था। येहदयाह एक मेरोनोतवासी था।
३१. याजीज भेड़ों का अधीक्षक था। याजीज हग्री लोगों में से था। ये सभी व्यक्ति वे प्रमुख थे जो दाऊद की सम्पत्ति की देखभाल करते थे।
३२. योनातान एक बुद्धिमान सलाहकार और शास्त्री था। योनातान दाऊद का चाचा था। हक्मोन का पुत्र एहीएल राजा के पुत्रों की देखभाल करता था।
३३. अहीतोपेल राजा का सलाहकार था। हुशै राजा का मित्र था। हुशै एरेकी लोगों में से था।
३४. बाद में यहोयादा और एब्यातार ने राजा के सलाहकार के रूप में अहीतोपेल का स्थान लिया। यहोयादा बनायाह का पुत्र था। योआब राजा की सेना का सेनापति था।

भजन संहिता ७८:५६-६६
५६. इतना होने पर भी इस्राएल के लोगों ने परम परमेश्वर को परखा और उसको बहुत दु:खी किया। वे लोग परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन नहीं करते थे।
५७. इस्राएल के लोग परमेश्वर से भटक कर विमुख हो गये थे। वे उसके विरोध में ऐसे ही थे, जैसे उनके पूर्वज थे। वे इतने बुरे थे जैसे मुड़ा धनुष।
५८. इस्राएल के लोगों ने ऊँचे पूजा स्थल बनाये और परमेश्वर को कुपित किया। उन्होंने देवताओं की मूर्तियाँ बनाई और परमेश्वर को ईर्ष्यालु बनाया।
५९. परमेश्वर ने यह सुना और बहुत कुपित हुआ। उसने इस्राएल को पूरी तरह नकारा!
६०. परमेश्वर ने शिलोह के पवित्र तम्बू को त्याग दिया। यह वही तम्बू था जहाँ परमेश्वर लोगों के बीच में रहता था।
६१. फिर परमेश्वर ने उसके निज लोगों को दूसरी जातियों को बंदी बनाने दिया। परमेश्वर के “सुन्दर रत्न” को शत्रुओं ने छीन लिया।
६२. परमेश्वर ने अपने ही लोगों (इस्राएली) पर निज क्रोध प्रकट किया। उसने उनको युद्ध में मार दिया।
६३. उनके युवक जलकर राख हुए, और वे कन्याएँ जो विवाह योग्य थीं, उनके विवाह गीत नहीं गाये गए।
६४. याजक मार डाले गए, किन्तु उनकी विधवाएँ उनके लिए नहीं रोई।
६५. अंत में, हमारा स्वामी उठ बैठा जैसे कोई नींद से जागकर उठ बैठता हो। या कोई योद्धा दाखमधु के नशे से होश में आया हो।
६६. फिर तो परमेश्वर ने अपने शत्रुओं को मारकर भगा दिया और उन्हें पराजित किया। परमेश्वर ने अपने शत्रुओं को हरा दिया और सदा के लिये अपमानित किया।

नीतिवचन २०:४-५
४. ऋतु आने पर अदूरदर्शी आलसी हल नहीं डालता है सो कटनी के समय वह ताकता रह जाता है और कुछ भी नहीं पाता है।
५. जन के मन प्रयोजन, गहन जल से छिपे होते किन्तु समझदार व्यक्ति उन्हें बाहर खींच लाता है।

प्रेरितों के काम १०:१-२३
१. कैसरिया में कुरनेलियुस नाम का एक व्यक्ति था। वह सेना के उस दल का नायक था जिसे इतालवी कहा जाता था।
२. वह परमेश्वर से डरने वाला भक्त था और वैसा ही उसका परिवार भी था। वह गरीब लोगों की सहायता के लिये उदारतापूर्वक दान दिया करता था और सदा ही परमेश्वर की प्रार्थना करता रहता था।
३. दिन के नवें पहर के आसपास उसने एक दर्शन में स्पष्ट रूप से देखा कि परमेश्वर का एक स्वर्गदूत उसके पास आया है और उससे कह रहा है, “कुरनेलियुस।”
४. सो कुरनेलियुस डरते हुए स्वर्गदूत की ओर देखते हुए बोला, “हे प्रभु, यह क्या है?” स्वर्गदूत ने उससे कहा, “तेरी प्रार्थनाएँ और दीन दुखियों को दिया हुआ तेरा दान एक स्मारक के रूप में तुझे याद दिलानेके लिए परमेश्वर के पास पहुचें हैं।
५. सो अब कुछ व्यक्तियोंको याफा भेज और शमौन नाम के एक व्यक्ति को, जो पतरस भीकहलाता है, यहाँ बुलवा ले।
६. वह शमौन नाम के एक चर्मकार के साथ रह रहा है। उसका घर सागर के किनारे है।”
७. वह स्वर्गदूत जो उससे बात कर रहा था, जब चला गया तो उसने अपने दो सेवकों और अपने निजीसहायकों में से एक भक्त सिपाही को बुलाया
८. और जोकुछघटित हुआ था, उन्हें सब कुछ बताकर याफा भेज दिया।
९. अगले दिन जब वे चलते चलते नगर के निकट पहुँचने ही वाले थे, पतरस दोपहर के समय प्रार्थना करने को छत पर चढ़ा।
१०. उसे भूख लगी, सो वह कुछ खाना चाहता था। वे जब भोजन तैयार कर ही रहे थे तो उसकी समाधि लग गयी।
११. और उसने देखा कि आकाश खुल गया है और एक बड़ी चादर जैसी कोई वस्तु नीचे उतर रही है। उसे चारों कोनों से पकड़ कर धरती पर उतारा जा रहा है।
१२. उस पर हर प्रकार के पशु, धरती के रेंगने वांले जीवजंतु और आकाश के पक्षी थे।
१३. फिर एक स्वर ने उससे कहा, “पतरस उठ। मार और खा।”
१४. पतरस ने कहा, “प्रभु, निश्चित रूप मे नहीं, क्योंकि मैंने कभी भी किसी तुच्छ या समय के अनुसार अपवित्र आहार को नहीं लिया है।”
१५. इस पर उन्हें दूसरी बार फिर वाणी सुनाई दी, “किसी भी वस्तु को जिसे परमेश्वर ने पवित्र बनाया है, तुच्छ मत कहना!”
१६. तीन बार ऐसा ही हुआ और वह वस्तु फिर तुरंत आकाश में वापस उठा ली गयी।
१७. पतरस ने जिस दृश्य को दर्शन में देखा था, उस पर वह अभी चक्कर में ही पड़ा हुआ था कि कुरनेलियुस के भेजे वे लोग दरवाजे पर खड़े पूछ रहे थे कि शमौन का घर कहाँ है?
१८. उन्होंने बाहर बुलाते हुए पूछा, “क्या पतरस कहलाने वाला शमौन अतिथि के रूप में यहीं ठहरा है?”
१९. पतरस अभी उस दर्शन के बारे में सोच ही रहा था कि आत्मा ने उससे कहा, “सुन, तीन व्यक्ति तुझे ढूँढ रहे हैं।
२०. सो खड़ा हो, और नीचे उतर बेझिझक उनके साथ चला जा, क्योंकि उन्हें मैंने ही भेजा है।”
२१. इस प्रकार पतरस नीचे उतर आया और उन लोगों से बोला, “मैं वही हूँ, जिसे तुम खोज रहे हो। तुम क्यों आये हो?”
२२. वे बोले, “हमें सेनानायक कुरनेलियुस ने भेजा है। वह परमेश्वर से डरने वाला नेक पुरूष है। यहूदी लोगों में उसका बहुत सम्मान है। उससे पवित्र स्वर्गदूत ने तुझे अपने घर बुलाने का निमन्त्रण देने को और जो कुछ तू कहे उसे सुनने को कहा है।”
२३. इस पर पतरस ने उन्हें भीतर बुला लिया और ठहरने को स्थान दिया। फिर अगले दिन तैयार होकर वह उनके साथ चला गया। और याफा के निवासी कुछ अन्य बन्धु भी उसके साथ हो लिये।