एक साल में बाइबल
जुलाई 27


1 इतिहास 26:1-32
1. फिर द्वारपालों के दल ये थे : कोरहियों में से तो मशेलेम्याह, जो कोरे का पुत्रा और आसाप के सन्तानों मेंसे था।
2. और मशेलेम्याह के पुत्रा हुए, अर्थात् उसका जेठा जकर्याह दूसरा यदीएल, तीसरा जवद्याह,
3. चौथा यतीएल, पांचवां एलाम, छठवां यहोहानान और सातवां एल्यहोएनै।
4. फिर ओबेदेदोम के भी पुत्रा हुए, उसका जेठा शमायाह, दूसरा यहोजाबाद, तीसरा योआह, चौथा साकार, पांचवां नतनेल,
5. छठवां अम्मीएल, सातवां इस्साकार और आठवां पुल्लतै, क्योंकि परमेश्वर ने उसे आशीष दी थी।
6. और उसके पुत्रा शमायाह के भी पुत्रा उत्पन्न हुए, जो शूरवीर होने के कारण अपने पिता के घराने पर प्रभुता करते थे।
7. शमायाह के पुत्रा ये थे, अर्थात् ओती, रपाएल, ओबेद, एलजाबाद और उनके भाई एलीहू और समक्याह बलवान पुरूष थे।
8. ये सब आबेदेदोम की सन्तान में से थे, वे और उनके पुत्रा और भाई इस सेवकाई के लिये बलवान और शक्तिमान थे; ये ओबेदेदोमी बासठ थे।
9. और मशेलेम्याह के पुत्रा और भाई अठारह थे, जो बलवान थे।
10. फिर मरारी के वंश में से होसा के भी पुत्रा थे, अर्थात् मुख्य तो शिम्री ( जिसको जेठा न होने पर भी उसके पिता ने मुख्य ठहराया ),
11. दूसरा हिल्किरयाह, तीसरा तबल्याह और चौथा जकर्याह था; होसा के सब पुत्रा और भाई मिलकर तेरह थे।
12. द्वारपालों के दल इन मुख्य पुरूषों के थे, ये अपने भाइयों के बराबर ही यहोवा के भवन में सेवा टहल करते थे।
13. इन्हों ने क्या छोटे, क्या बड़े, अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार एक एक फाटक के लिये चिट्ठी डाली।
14. पूर्व की ओर की चिट्ठी शेलेम्याह के नाम पर निकली। तब उन्हों ने उसके पुत्रा जकर्याह के नाम की चिट्ठी डाली ( वह बुध्दिमान मंत्री था ) और चिट्ठी उत्तर की ओर के लिये निकली।
15. दक्खिन की ओर के लिये ओबोदेदोम के नाम पर चिट्ठी निकली, और उसके बेटों के नाम पर खजाने की कोठरी के लिये।
16. फिर शुप्पीम और होसा के नामों की चिट्ठी पश्चिम की ओर के लिये निकली, कि वे शल्लेकेत नाम फाटक के पास चढ़ाई की सड़क पर आम्हने साम्हने चौकीदारी किया करें।
17. पूर्व ओर जो छे लेवीय थे, उत्तर की ओर प्रतिदिन चार, दक्खिन की ओर प्रतिदिन चार, और खजाने की कोठरी के पास दो ठहरे।
18. पश्चिम ओर के पर्बार नाम स्थान पर ऊंची सड़क के पास तो चार और पर्बार के पास दो रहे।
19. ये द्वारपालों के दल थे, जिन में से कितने तो कोरह के थे और कितने मरारी के वंश के थे।
20. फिर लेवियों में से अहिरयाह परमेश्वर के भवन और पवित्रा की हुई वस्तुओं, दोनों के भण्डारों का अधिकारी नियुक्त हुआ।
21. ये लादान की सन्तान के थे, अर्थात् गेर्शेनियों की सन्तान जो लादान के कुल के थे, अर्थात् लादान और गेर्शेनी के पितरों के घरानों के मुख्य पुरूष थे, अर्थात् यहोएली ।
22. यहोएली के पुत्रा ये थे, अर्थात् जेताम और उसका भाई योएल जो यहोवा के भवन के खजाने के अधिकारी थे।
23. अम्रामियों, यिसहारियों, हेब्रोनियों और उज्जीएलियों में से।
24. और शबूएल जो मूसा के पुत्रा गेर्शेम के वंश का था, वह खजानों का मुख्य अधिकारी था।
25. और उसके भाइयों का वृत्तान्त यह है : एलीआजर के कुल में उसका पुत्रा रहब्याह, रहब्याह का पुत्रा यशायाह, यशायाह का पुत्रा योराम, योराम का पुत्रा जिक्री, और जिक्री का पुत्रा शलोमोत था।
26. यही शलोमोत अपने भाइयों समेत उन सब पवित्रा की हुई पस्तुओं के भण्डारों का अधिकारी था, जो राजा दाऊद और पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरूषों और सहस्रपतियों और शतपतियों और मुख्य सेनापतियों ने पवित्रा की थीं।
27. जो लूट लड़ाइयों में मिलती थी, उस में से उन्हों ने यहोवा का भवन दृढ़ करने के लिये कुछ पवित्रा किया।
28. वरन जितना शमूएल दश , कीश के पुत्रा शाऊल, नेर के पुत्रा अब्नेर, और सरूयाह के पुत्रा योआब ने पवित्रा किया था, और जो कुछ जिस किसी ने पवित्रा कर रखा था, वह सब शलोमोत और उसके भाइयों के अधिकार में था।
29. यिसहारियों में से कनन्याह और उसके पुत्रा, इस्राएल के देश का काम अर्थात् सरदार और न्यायी का काम करने के लिये नियुक्त हुए।
30. और हेब्रोनियों में से हशरयाह और उसके भाई जो सत्राह सौ बलवान पुरूष थे, वे यहोवा के सब काम और राजा की सेवा के विषय यरदन की पश्चिम ओर रहनेवाले इस्राएलियों के अणिकारी ठहरे।
31. हेब्रोनियों में से यरिरयाह मुख्य था, अर्थात् हेब्रोनियों की पीढ़ी पीढ़ी के पितरों के घरानों के अनुसार दाऊद के राज्य के चालीसवें वर्ष में वे ढूंढ़े गए, और उन में से कई शूरवीर गिलाद के याजेर में मिले।
32. और उसके भाई जो वीर थे, पितरों के घरानों के दो हाजार सात सौ मुख्य पुरूष थे, इनको दाऊद राजा ने परमेश्वर के सब विषयों और राजा के विषय में रूबेनियों, गादियों और मनश्शेके आधे गोत्रा का अधिकारी ठहराया।

1 इतिहास 27:1-34
1. इस्राएलियो की गिनती, अर्थात् मितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरूषों और यहस्रपतियों और शतपतियों और उनके सरदारों की गिनती जो वर्ष भर के महीने महीने उपस्थित होने और छुट्टी पानेवाले दलों के सब विषयों में राजा की सेवा टहल करते थे, एक एक दल में चौबीस हजार थे।
2. पहिले महीने के लिये पहिले दल का अधिकारी जब्दीएल का पुत्रा याशोबाम नियुक्त हुआ; और उसके दल में चौबीस हजार थे।
3. वह पेरेस के वंश का था और पहिले महीने में सब सेनापतियों का अधिकारी था।
4. और दूसरे महीने के दल का अधिकारी दोदै नाम एक अहोही था, और उसके दल का प्रधान मिक्लोत था, और उसके दल में चौबीस हजार थे।
5. तीसरे महीने के लिये तीसरा सेनापति यहोयादा याजक का पुत्रा बनायाह था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
6. यह वही बनायाह है, जो तीसों शूरों में वीर, और तीसों में श्रेष्ठ भी था; और उसके दल में उसका पुत्रा अम्मीजाबाद था।
7. चौथे महीने के लिये चौथा सेनापति योआब का भाई असाहेल था, और उसके बाद उसका पुत्रा जबद्याह था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
8. पांचवें महीने के लिये पांचवां सेनापति यिज्राही शम्हूत था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
9. छठवें महीने के लिये छठवां सेनापति तकोई इक्केश का पुत्रा ईरा था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
10. सातवें महीने के लिये सातवां सेनापति एप्रैम के वंश का हेलेस पलोनी था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
11. आठवें महीने के लिये आठवां सेनापति जेरह के वंश में से हूशाई सिब्बकै था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
12. नौवें महीने के लिये नौवां सेनापति बिन्यामीनी अबीएजेर अनातोतवासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
13. दसवें महीने के लिये दसवां सेनापति जेरही महरै नतोपावासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
14. ग्यारहवें महीने के लिये ग्यारहवां सेनापति एप्रैम के वंश का बनायाह पिरातोनवासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
15. बारहवें महीने के लिये बारहवां सेनापति ओत्नीएल के वंश का हेल्दै नतोपावासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे।
16. फिर इस्राएली गोत्रों के ये अधिकारी थे : अर्थात् रूबेनियों का प्रधान जिक्री का पुत्रा एलीआज़र; शिमोनियों से माका का पुत्रा शपत्याह।
17. लेवी से कमूएल का पुत्रा हशब्याह; हारून की सन्तान का सादोक।
18. यहूदा का एलीहू नाम दाऊद का एक भाई, इस्साकार से मीकाएल का पुत्रा ओम्नी।
19. जबूलून से ओबद्याह का पुत्रा यिशमायाह, नप्ताली से अज्रीएल का पुत्रा यरीमोत।
20. एप्रैम से अजज्याह का पुत्रा होशे, मनश्शे से आधे गोत्रा का, फ़दायाह का पुत्रा योएल।
21. गिलाद में आधे गोत्रा मनश्शे से जकर्याह का पुत्रा इद्दॊ़, बिन्यामीन से अब्नेर का पुत्रा यासीएल,
22. और दान से यारोहाम का पुत्रा अजरेल, ठहरा। ये ही इस्राएल के गोत्रों के हाकिम थे।
23. परन्तु दाऊद ने उनकी गिनती बीस वर्ष की अवस्था के तीचे न की, क्योंकि यहोवा ने इस्राएल की गिनती आकाश के तारों के बराबर बढ़ाने के लिये कहा था।
24. सरूयाह का पुत्रा योआब गिनती लेने लगा, पर निपटा न सका क्योंकि ईश्वर का क्रोध इस्राएल पर भड़का, और यह गिनती राजा दाऊद के इतिहास में नहीं लिखी गई।
25. फिर अदीएल का पुत्रा अजमावेत राज भण्डारों का अधिकारी था, और देहात और नगरों और गांवों और गढ़ों के भण्डारों का अणिकारी उज्जिरयाह का पुत्रा यहोनातान था।
26. और जो भूमि को जोतकर बोकर खेती करते थे, उनका अधिकारी कलूब का पुत्रा एज्री था।
27. और दाख की बारियों का अधिकारी रामाई शिमी और दाख की बारियों की उपज जो दाखमधु के भण्डारों में रखने के लिये थी, उसका अधिकारी शापामी जब्दी था।
28. ओर नीचे के देश के जलपाई और गूलर के वृक्षों का अधिकारी गदेरी बाल्हानान था और तेल के भण्डारों का अधिकारी योआश था।
29. और शारोन में चरनेवाले गाय- बैलों का अधिकारी शारोनी शित्रौ था और तराइयों के गाय- बैलों का अधिकारी अदलै का पुत्रा शापात था।
30. और ऊंटों का अधिकारी इश्माएली ओबील और गदहियों का अधिकारी मेरोनोतवासी येहदयाह।
31. और भैड़- बकरियों का अधिकारी हग्री याजीज था। ये ही सब राजा दाऊद के धन सम्मत्ति के अधिकारी थे।
32. और दाऊद का भतीजा योनातान एक समझदार मंत्री और शास्त्री था, और किसी हक्मोनी का पुत्रा एहीएल राजपुत्रों के संग रहा करता था।
33. और अहीतोपेल राजा का मंत्री था, और एरेकी हूशै राजा का मित्रा था।
34. और यहीतोपेल के बाद बनायाह का पुत्रा यहोयादा और एरयातार मंत्री ठहराए गए। और राजा का प्रधान सेनापति योआब था।

भजन संहिता 78:56-66
56. तौभी उन्होने परमप्रधान परमेश्वर की परीक्षा की और उस से बलवा किया, और उसकी चितौनियों को न माना,
57. और मुड़कर अपने पुरखाओं की नाई विश्वासघात किया; उन्हों ने निकम्मे धनुष की नाई धोखा दिया।
58. क्योंकि उन्हों ने ऊंचे स्थान बनाकर उसको रिस दिलाई, और खुदी हुई मुर्तियों के द्वारा उस में जलन उपजाई।
59. परमेश्वर सुनकर रोष से भर गया, और उस ने इस्त्राएल को बिलकुल तज दिया।
60. उस ने शीलो के निवास, अर्थात् उस तम्बु को जो उस ने मनुष्यों के बीच खडा किया था, त्याग दिया,
61. और अपनी सामर्थ को बन्धुआई में जाने दिया, और अपनी शोभा को द्रोही के वश में कर दिया।
62. उस ने अपनी प्रजा को तलवार से मरवा दिया, और अपने निज भाग के लोगों पर रोष से भर गया।
63. उन के जवान आग से भस्म हुए, और उनकी कुमारियों के विवाह के गीत न गाए गए।
64. उनके याजक तलवार से मारे गए, और उनकी विधवाएं रोने न पाई।
65. तब प्रभु मानो नींद से चौंक उठा, और ऐसे वीर के समान उठा जो दाखमधु पीकर ललकारता हो।
66. और उस ने अपने द्रोहियों को मारकर पीछे हटा दिया; और उनकी सदा की नामधराई कराई।।

नीतिवचन 20:4-5
4. आलसी मनुष्य शीत के कारण हल नहीं जोतता; इसलिये कटनी के समय वह भीष मांगता, और कुछ नहीं पाता।
5. मनुष्य के मन की युक्ति अथाह तो है, तौभी समझवाला मनुष्य उसको निकाल लेता है।

प्रेरितों के काम 10:1-23
1. कैसरिया में कुरनेलियुस नाम ऐक मनुष्य था, जो इतालियानी नाम पलटन का सूबेदार था।
2. वह भक्त था, और अपने सारे घराने समेत परमेश्वर से डरता था, और यहूदी लागों को बहुत दान देता, और बराबर परमेश्वर से प्रार्थना करता था।
3. उस ने दिन के तीसरे पहर के निकट दर्शन में स्पष्ट रूप से देखा, कि परमेश्वर का एक स्वर्गदूत मेरे पास भीतर आकर कहता है; कि हे कुरनेलियुस।
4. उस ने उसे ध्यान से देखा; और डरकर कहा; हे प्रभु क्या है? उस ने उस से कहा, तेरी प्रार्थनाएं और तेरे दान स्मरण के लिये परमेश्वर के साम्हने पहुंचे हैं।
5. और अब याफा में मनुष्य भेजकर शमौन को, जो पतरस कहलाता है, बुलवा ले।
6. वह शमौन चमड़े के धन्धा करनेवाले के यहां पाहुन है, जिस का घर समुद्र के किनारे हैं।
7. जब वह स्वर्गदूत जिस ने उस से बातें की थीं चला गया, तो उस ने दो सेवक, और जो उसके पास उपस्थित रहा करते थे उन में से एक भक्त सिपाही को बुलाया।
8. और उन्हें सब बातें बताकर याफा को भेजा।।
9. दूसरे दिन, जब वे चलते चलते नगर के पास पहुंचे, तो दो पहर के निकट पतरस कोठे पर प्रार्थना करने चढ़ा।
10. और उसे भूख लगी, और कुछ खाना चाहता था; परन्तु जब वे तैयार कर रहे थे, तो वह बेसुध हो गया।
11. और उस ने देखा, कि आकाश खुल गया; और एक पात्रा बड़ी चादर के समान चारों कोनों से लटकता हुआ, प्थ्वी की ओर उतर रहा है।
12. जिस में पृथ्वी के सब प्रकार के चौपाए और रेंगनेवाले जन्तु और आकाश के पक्षी थे।
13. और उसे एक ऐसा शब्द सुनाई दिया, कि हे पतरस उठ, मार के खा।
14. परन्तु पतरस ने कहा, नहीं प्रभु, कदापि नहीं; क्योंकि मैं ने कभी कोई अपवित्रा या अशुद्ध वस्तु नहीं खाई है।
15. फिर दूसरी बार उसे शब्द सुनाई दिया, कि जो कुछ परमेश्वर ने शुद्ध ठहराया है, उसे तू अशुद्ध मत कह।
16. तीन बार ऐसा ही हुआ; तब तुरन्त वह पात्रा आकाश पर उठा लिया गया।।
17. जब पतरस अपने मन में दुबधा कर रहा था, कि यह दर्शन जो मैं ने देखा क्या है, तो देखो, वे मनुष्य जिन्हें कुरनेलियुस ने भेजा था, शमौन के घर का पता लगाकर डेवढ़ी पर आ खड़े हुए।
18. और पुकारकर पूछने लगे, क्या शमौन जो पतरस कहलाता है, यहीं पाहुन है?
19. पतरस जो उस दर्शन पर सोच ही रहा था, कि आत्मा ने उस से कहा, देख, तीन मनुष्य तेरी खोज में हैं।
20. सो उठकर नीचे जा, और बेखटके उन के साथ हो ले; क्योंकि मैं ही ने उन्हें भेजा है।
21. तब पतरस ने उतरकर उन मनुष्यों से कहा; देखो, जिसकी खोज तुम कर रहे हो, वह मैं ही हूं; तुम्हारे आने का क्या कारण है?
22. उन्हों ने कहा; कुरनेलियुस सूबेदार जो धर्मी और परमेश्वर से डरनेवाला और सारी यहूदी जाति में सुनामी मनुष्य है, उस ने एक पवित्रा स्वर्गदूत से यह चितावनी पाई है, कि तुझे अपने घर बुलाकर तुझ से वचन सुने।
23. तब उस ने उन्हें भीतर बुलाकर उन की पहुनाई की।। और दूसरे दिन, वह उनके साथ गया; और याफा के भाइयों में से कई उसके साथ हो लिए।